दिल्ली का जंतर-मंतर छोड़ CJP ने मुंबई से क्यों शुरू किया आंदोलन? अभिजीत दीपके ने बताया पूरा प्लान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ...और पढ़ें
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दीपके ने बताया CJP के मुंबई आंदोलन का पूरा प्लान (फोटो- रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को शुक्रवार को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से 'जेल भरो आंदोलन' शुरू किया है।
इस प्रोटेस्ट की शुरुआत शुक्रवार शाम को छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क के गेट नंबर 6 के पास से शुरू हुआ। इस प्रोटेस्ट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीजेपी ने इस बार प्रदर्शन के लिए दिल्ली के बजाय मुंबई को क्यों चुना है?
मुंबई को चुनने के पीछे की वजह
दरअसल, पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने बताया कि मुंबई से आंदोलन शुरू करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है। दीपके के अनुसार, प्रदर्शन बाद में गोवा और कोलकाता समेत देश के दूसरे हिस्सों में ले जाया जाएगा और आखिर में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई को प्रदर्शन की शुरुआत के लिए चुनने की वजह बताते हुए दीपके ने महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में बीजेपी को सिर्फ 9 सीटें मिली थीं।
इसके बाद करीब 6 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और महायुति को 230 सीटें हासिल हुईं। दीपके ने सवाल उठाया कि इतना बड़ा बदलाव कैसे संभव हुआ?
क्या अंग्रेजों ने कभी आंदोलन की इजाजत दी थी?
2 अक्टूबर (गांधी जयंती) का दिन चुने जाने पर दीपके ने कहा कि मुंबई का महात्मा गांधी और भारत छोड़ो आंदोलन से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है। मुंबई पुलिस द्वारा यातायात और अनुमति न होने का हवाला देकर प्रदर्शन पर रोक लगाने के बाद दीपके ने तर्क दिया, "हम अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले बापू के सिद्धांतों पर चल रहे हैं, क्या अंग्रेजों ने कभी आंदोलन की इजाजत दी थी?"
उन्होंने आगे कहा, "मुंबई का एक समृद्ध ऐतिहासिक अतीत है और महात्मा गांधी से इसका गहरा संबंध है। यहीं मुंबई (तब बॉम्बे) में महात्मा गांधी ने 9 अगस्त, 1942 को गावलिया टैंक (जिसे अब अगस्त क्रांति मैदान कहा जाता है) से भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी।"
