भारत में तेजी से घट रहा भूजल, दुनिया के 34% केंद्रों में गहराया संकट; एक साल में 9 प्रतिशत की आई गिरावट
दुनियाभर में भूजल संकट गहरा रहा है, 2025 में 34% वैश्विक केंद्रों पर जल स्तर सामान्य से नीचे पाया गया, जो एक साल में 9% की वृद्धि दर्शाता है।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में भूजल का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर 34 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था।
इस प्रकार महज एक साल के भीतर इस संकट में 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां भूजल स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है।
तीन साल में तेजी से बिगड़े हालात
वैश्विक स्तर पर पिछले तीन वर्षों के दौरान भूजल की स्थिति तेजी से खराब हुई है। वर्तमान में दुनिया के 65 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य सीमा से बाहर चला गया है।
वर्ष 2022 से 2025 के बीच भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, मेक्सिको, चिली, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भूजल में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव से पिछले तीन वर्षों में दुनिया भर के ग्लेशियरों से 1400 गीगाटन बर्फ पिघलकर नष्ट हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में पानी की किल्लत और उससे जुड़ी समस्याओं के कारण हुई कुल मौतों में से 80 प्रतिशत मौतें एशिया और अफ्रीका में दर्ज की गईं।
वहीं वर्ष 2021 से 2025 के चार वर्षों के दौरान गंगा और सिंधु नदी के ऊपरी बेसिन क्षेत्रों में जमीन के नीचे जमा पानी में लगातार कमी देखी गई है।
नदियों के लिए सबसे सूखा वर्ष रहा 2025
वर्ष 2025 नदियों के जल प्रवाह के लिहाज से भी अत्यंत प्रतिकूल साबित हुआ है। इस दौरान दुनिया के 36 प्रतिशत नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव सामान्य से कम रहा।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1991 से लेकर 2025 तक की समयावधि में यह नदियों के लिए अब तक का सबसे सूखा वर्ष दर्ज किया गया।
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