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'पाकिस्तान नहीं चीन हमारी सबसे बड़ी चुनौती, सेना को तैयार रहना होगा'; पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की चेतावनी

Published: Fri, 21 Aug 2026 10:21 AM (IST)

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से आतंकवाद की चुनौती तात्कालिक है, लेकिन चीन लंबी अवधि में भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगा।

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल नरवणे(फाइल फोटो)

पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल नरवणे(फाइल फोटो)

HighLights

  1. चीन लंबी अवधि में भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगा।

  2. मजबूत सैन्य प्रतिरोध क्षमता और बातचीत का रास्ता खुला रखें।

  3. पड़ोसी देशों में स्थिरता भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बड़ा और दूरदर्शी बयान दिया है। अपनी नई पुस्तक के विमोचन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पाकिस्तान से मिलने वाली आतंकवाद की चुनौती के कारण भारत का ध्यान उस पर अधिक केंद्रित रहा है, लेकिन लंबी अवधि में चीन ही भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगा।

जनरल नरवणे ने कूटनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए चीन के लिए दुश्मन शब्द का प्रयोग करने से परहेज किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को बातचीत का रास्ता खुला रखने के साथ-साथ अपनी सैन्य प्रतिरोध क्षमता को भी बेहद मजबूत बनाए रखना होगा।

पाकिस्तान और चीन के बीच का अंतर

सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ भारत के अनसुलझे सीमा विवाद हैं और युद्ध का इतिहास रहा है, लेकिन दोनों देश पूरी तरह से अलग श्रेणी में आते हैं। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के कारण भारत का तात्कालिक ध्यान अपनी पश्चिमी सीमा पर केंद्रित रहता है।

हालांकि, लंबे समय में चीन राजनीति, अर्थशास्त्र, व्यापार और सैन्य मामलों सहित सभी क्षेत्रों में भारत का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जहां प्रतिस्पर्धा होती है, वहां संघर्ष की गुंजाइश भी बनी रहती है।

वार्ता पहली प्राथमिकता, सैन्य तैयारी अनिवार्य

नरवणे ने जोर देकर कहा कि भारत को बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक तंत्र और बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। शक्ति का उपयोग हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए।

हालांकि, किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों का हर समय तैयार रहना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई देश शांति चाहता है, तो उसे युद्ध के लिए तैयार रहना होगा ताकि एक मजबूत सैन्य निरोध स्थापित किया जा सके।

भारत को स्थिर पड़ोस की आवश्यकता

क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करते हुए उन्होंने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में शांति बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इंसान वास्तविक जीवन और भू-राजनीति दोनों में अपने पड़ोसी नहीं चुन सकता, इसलिए उपलब्ध परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने होते हैं।

यदि पड़ोसी देश में अस्थिरता, हिंसा या शरणार्थी संकट उत्पन्न होता है, तो इसका सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा, तस्करी और अवैध हथियारों की आवाजाही पर पड़ता है। इसलिए पड़ोस को स्थिर रखना भारत के अपने शांति और विकास के हित में है।

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