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दिल्ली: डॉ. चिन्मय पंड्या के नेतृत्व में गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी महोत्सव का शुभारंभ, ओम बिरला और सिंधिया ने की शिरकत

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:42 PM (IST)

अखिल विश्व गायत्री परिवार का तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ध्वजारोहण और वैदिक अनुष्ठानों के साथ शुरू हुआ।

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HighLights

  1. महोत्सव का शुभारंभ ध्वजारोहण और वैदिक अनुष्ठानों से हुआ।

  2. ओम बिरला और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समारोह को संबोधित किया।

  3. व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अखिल विश्व गायत्री परिवार का तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव आज नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में ध्वजारोहण और वैदिक अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ।

परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन 20 हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने समारोह को संबोधित किया।

महोत्सव का शुभारंभ दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और महोत्सव के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण कर किया। इस दौरान शांतिकुंज, हरिद्वार से आए विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण की अलख जगा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था ने संस्कार निर्माण और मूल्यपरक शिक्षा के ज़रिए समाज में चेतना जागृत की है।

अखंड दीप के सौ वर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "यह अखंड ज्योति तब तक जलती रहेगी, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रकाश नहीं पहुंच जाता।" बिरला ने कहा कि आज जब दुनिया के कई देशों में अशांति फैली है, ऐसे दौर में गायत्री परिवार ने आध्यात्मिकता के ज़रिए शांति स्थापना की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा, "गांव-गांव में परिवार निर्माण और व्यक्ति निर्माण के ज़रिए राष्ट्र निर्माण का संकल्प पूरा हो, ऐसी कामना करता हूं।"

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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उपस्थित जनसमुदाय से तीन संकल्प लेने का आह्वान किया। पहला, मातृत्व, प्रेम और भाईचारे का प्रचार और प्रसार। दूसरा, समाज के हर क्षेत्र में नारी का सम्मान और उन्हें आगे बढ़ाना। तीसरा, भारतीय संस्कृति का निरंतर संरक्षण और संवर्धन करते हुए उसे आने वाली पीढ़ी को समर्पित करना तथा नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना का विकास करना। दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने अतिथियों का सम्मान किया।

डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्ष 2026 अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए केवल उत्सव का वर्ष नहीं, बल्कि सौ वर्षों की साधना, त्याग और समर्पण का ऐतिहासिक पड़ाव है। यह माता भगवती देवी शर्मा के जन्म, अखंड दीप के प्रज्वलन और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष पूरे होने का अवसर है। उन्होंने कहा कि महोत्सव की मूल भावना राजतंत्र की व्यवस्था शक्ति और धर्मतंत्र की नैतिक चेतना को लोकमंगल के लिए एक साथ लाना है।

महोत्सव में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के लगभग 650 विद्यार्थी आयोजन प्रबंधन से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक विभिन्न दायित्व निभा रहे हैं। विश्वविद्यालय के 40 विद्यार्थियों ने प्रज्ञा योग की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जबकि पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के लोक एवं जनजातीय नृत्यों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता का संदेश दिया।

महोत्सव का प्रथम चरण इसी वर्ष हरिद्वार में गंगा की दो धाराओं के बीच स्थित वैरागी द्वीप पर संपन्न हुआ था। दिल्ली में आयोजित द्वितीय चरण में वर्ष की शुरुआत में लिए गए व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों की समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है।

महोत्सव का पहला दिन मातृशक्ति और नारी जागरण को समर्पित है। दूसरे दिन वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधुत्व पर कार्यक्रम होंगे, जिसमें सामूहिक दीपयज्ञ के माध्यम से विश्व शांति और सद्भाव के संकल्प लिए जाएंगे। तीसरे दिन युग निर्माण के महासंकल्प के साथ 2 नवंबर को महोत्सव का समापन होगा।

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