उज्जैन, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के कारण मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में अन्य राज्यों के दर्शनार्थियों के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी गई है। अब सभी राज्यों के श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रविवार को कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में हुई आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में इसका निर्णय लिया गया। श्रावण मास में केवल मध्य प्रदेश में रहने वाले दर्शनार्थियों को ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा था।

नई दर्शन व्यवस्था लागू

मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत ने बताया कि श्रावण मास संपन्न होने के बाद मंदिर में नई दर्शन व्यवस्था लागू कर रहे हैं। इसकी योजना मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर आशीष सिंह को दी गई थी। योजना में अन्य प्रदेश के भक्तों को भी भगवान महाकाल के दर्शन की अनुमति देने की सिफारिश की गई थी।

अग्रिम बुकिंग अनिवार्य

अब रविवार को इसकी स्वीकृति मिल गई है। सोमवार से देशभर से आने वाले भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि कोरोना संक्रमण को देखते हुए अग्रिम बुकिंग के आधार पर ही दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी। भक्तों को भगवान महाकाल के दर्शन करने आने से पहले महाकाल एप अथवा मंदिर की वेबसाइट पर अग्रिम बुकिंग कराना अनिवार्य है।

भादो मास में पहली सवारी आज

भगवान महाकाल की पहली सवारी सोमवार को निकलेगी। श्रावण-भादो मास के क्रम में यह भगवान महाकाल की छठी सवारी है। इसके बाद 17 अगस्त को शाही सवारी निकाली जाएगी। ज्योतिर्लिग महाकाल मंदिर के सभा मंडप में परंपरा अनुसार कलेक्टर आशीष सिंह भगवान महाकाल के मनमहेश रूप का पूजन कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना करेंगे। शाम चार बजे शाही ठाठबाट के साथ अवंतिकानाथ का नगर भ्रमण शुरू होगा। इसके बाद सवारी पुन:महाकाल मंदिर पहुंचेगी।

शाही सवारी में हो सकता है हरि-हर मिलन

17 अगस्त को निकलने वाली शाही सवारी में गोपाल मंदिर पर हरि-हर मिलन हो सकता है। रविवार को हुई आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने शाही सवारी को परंपरागत मार्ग से निकालने की मांग की है। मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत का कहना है कि सवारी को गोपाल मंदिर के सामने से निकाले जाने पर विचार किया जा रहा है।

क्‍या है हरि-हर मिलन

मालूम हो, श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी हर वर्ष गोपाल मंदिर के सामने से होकर गुजरती है। गोपाल मंदिर के मुख्य द्वार पर पुजारी भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करते हैं। इसे हरि-हर मिलन कहा जाता है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते महाकाल की सवारी नए मार्ग से निकाली जा रही है। ऐसे में बीती पांच सवारियों में हरि और हर का मिलन नहीं हो पाया है।

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