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ऑपरेशन सिंदूर से वेनेजुएला तक: चीनी हथियारों और रडार की लगातार विफलताएं, बीजिंग की साख पर सवाल

Published: Thu, 08 Jan 2026 11:40 PM (IST)

विश्व के प्रमुख हथियार निर्यातकों में शुमार चीन को हाल के युद्धक्षेत्रों में एक के बाद एक झटके लग रहे ...और पढ़ें

ऑपरेशन सिंदूर से वेनेजुएला तक: चीनी हथियारों और रडार की लगातार विफलताएं (फोटो- रॉयटर)

ऑपरेशन सिंदूर से वेनेजुएला तक: चीनी हथियारों और रडार की लगातार विफलताएं (फोटो- रॉयटर)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्लई। विश्व के प्रमुख हथियार निर्यातकों में शुमार चीन को हाल के युद्धक्षेत्रों में एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। पिछले साल मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की चीनी वायु रक्षा प्रणालियों की नाकामी से लेकर हालिया अमेरिकी ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व में वेनेजुएला की रक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने तक, चीनी तकनीक दबाव में बार-बार असफल साबित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं चीन की सैन्य निर्यात की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा रही हैं, खासकर जब अमेरिकी और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) क्षमताओं का सामना हो।

वेनेजुएला में चीनी रडार की करारी हार

3 जनवरी 2026 को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने कराकस में छापा मारकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। तीन घंटे से कम चले इस ऑपरेशन में अमेरिकी EA-18G ग्रोवलर विमानों ने उन्नत इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से वेनेजुएला की रक्षा प्रणाली को अंधा कर दिया।

वेनेजुएला की वायु रक्षा का बड़ा हिस्सा चीनी था:

JY-27A रडार →बीजिंग द्वारा F-35 जैसे स्टेल्थ विमानों को पकड़ने वाला "एंटी-स्टेल्थ" रडार प्रचारित किया गया था।

JYL-1 सर्विलांस रडार →लंबी दूरी की निगरानी के लिए।

वाशिंगटन टाइम्स और न्यूजवीक की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये रडार अमेरिकी हमले में पूरी तरह विफल रहे। कोई अमेरिकी विमान नहीं पकड़ा गया, और जैमिंग से स्क्रीन पर सिर्फ शोर दिखा। रूसी S-300 और पैंटसिर-S1 प्रणालियां भी गोली नहीं चला सकीं। ताइवानी विशेषज्ञों ने इसे बीजिंग के लिए "प्रतिष्ठा का झटका" बताया, क्योंकि यह अमेरिकी तकनीकी श्रेष्ठता को रेखांकित करता है।

चीन ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना चीनी "एंटी-स्टेल्थ" दावों की पोल खोलती है।

ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान में HQ-9 की शर्मनाक असफलता

2025 मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की चीनी वायु रक्षा प्रणालियां बुरी तरह बेनकाब हुईं। भारत ने ब्रह्मोस, SCALP क्रूज मिसाइलों और लोइटरिंग म्यूनिशंस से पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जो गहराई तक पहुंचे।

पाकिस्तान की मुख्य प्रणालियां:

HQ-9 और HQ-16/LY-80 →कोई भारतीय मिसाइल रोक नहीं सकीं, कई बैटरियां नष्ट हुईं।

PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल →लक्ष्य भेदने में विफल, टुकड़े बरामद हुए।

J-10C और JF-17 →भारतीय राफेल और अन्य विमानों को चुनौती नहीं दे सके।

टाइम्स ऑफ इंडिया और अन्य रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान के 82% हथियार आयात चीन से होते हैं, लेकिन ये युद्ध में अप्रभावी साबित हुए। चीनी विश्लेषकों ने पाकिस्तानी ऑपरेटरों की ट्रेनिंग और इंटीग्रेशन को दोष दिया, लेकिन यह चीन की निर्यात गुणवत्ता पर सवाल उठाता है।क्यों हो रही हैं ये विफलताएं?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • अमेरिकी और भारतीय EW क्षमताएं (जैसे ग्रोवलर और भारतीय जैमिंग) चीनी रडार को आसानी से ब्लाइंड कर देती हैं।
  • चीनी प्रणालियां सिमुलेशन में अच्छी दिखती हैं, लेकिन रियल-टाइम कॉम्बैट में ट्रेनिंग और इंटीग्रेशन की कमी उजागर होती है।
  • ये घटनाएं ताइवान जैसे संभावित संघर्षों में चीनी तकनीक की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा कर रही हैं।

चीन दुनिया का चौथा बड़ा हथियार निर्यातक है

चीन दुनिया का चौथा बड़ा हथियार निर्यातक है, लेकिन ये असफलताएं उसके ग्राहकों (पाकिस्तान, वेनेजुएला आदि) में हिचकिचाहट बढ़ा रही हैं। भारत और अमेरिका की सफलताएं सिद्ध तकनीक पर जोर दे रही हैं। आने वाले समय में बीजिंग को अपनी सैन्य निर्यात रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।