भोपाल, जेएनएन। भोपाल के पूर्व नवाब हमीदुल्ला खान की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान के पुत्र शहरयार खान ने अपने नाना की संपत्ति पर अपना हक जताया है। शहरयार पाकिस्तान के विदेश सचिव भी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में संपत्ति पर हक के लिए गत दिनों एक याचिका दायर की गई है। इसमें नवाब संपत्ति से जुड़े 14 वारिसों ने अपना हक मांगा है। इनमें शहरयार खान भी एक पार्टी हैं। आबिदा सुल्तान नवाब की बड़ी बेटी थीं, लेकिन वे 1950 से 52 के बीच पाकिस्तान चली गई थीं। अब 68 साल बाद आबिदा के पुत्र शहरयार ने भी नवाब की संपत्ती पर अपना हक जताने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

इन्‍होंने जताई आपत्ति

शर्मिला टैगोर की तरफ से पैरवी कर रहे वकील राजेश पंचोली ने इस पर आपत्ति जताई है। आरके पंचोली ने कहा कि भोपाल नवाब की मौत 1960 में हुई थी, इसके पहले ही आबिदा सुल्तान पाकिस्तान जा चुकी थीं। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ने साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित किया है। ऐसे में शहरयार खान का कोई हक नहीं बनता है। फैजबिन जंग, (नवाब पटौदी का भांजा) पाकिस्तान से भी कुछ लोगों ने नवाब संपत्ति पर अपना हक जताया है। इसके लिए हाई कोर्ट में अपील दायर की गई है, लेकिन इस पर मैंने आपत्ति जताई है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था एक फैसला

दरअसल, 31 जुलाई 2019 को रामपुर स्टेट के संबंध में नवाब की संपत्तियों के बंटवारे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया कि नवाब संपत्तियों का बंटवारा मुस्लिम विधि (शरीयत) के हिसाब से होगा। इसे आधार बनाकर हाई कोर्ट जबलपुर में एक अपील दायर कर नवाब संपत्तियों पर करीब 14 लोगों ने अपना अधिकार मांगा है। हालांकि, इस मामले में नवाब मंसूर अली खान पटौदी के भांजे फैजबिन खान का कहना है कि आबिदा सुल्तान के पाकिस्तान जाने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति ने साजिदा सुल्तान को भोपाल का प्रशासक नियुक्त किया था। इसके चलते नवाब खानदान की सभी संपत्तियों पर साजिदा सुल्तान का नाम रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया।

1960 में हो गई थी नवाब की मौत

बता दें कि नवाब की मौत 1960 में हो गई थी, लेकिन उससे पहले ही 1951-52 में उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान भारत छोड़कर पाकिस्तान चली गई थीं। कायदे से नवाब की मौत के बाद सबसे बड़ी संतान होने के नाते आबिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए था और सारी संपत्ति उनके कब्जे में आना चाहिए थी, लेकिन वे भारत छोड़ चुकी थीं। इसलिए 1962 में नवाब की मंझली बेटी साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया था।

इन्होंने भी मांगा अपना हक

- सैफिया एजुकेशन सोसायटी के सीईओ जैनुद्दिन शाह।

- नवाब के बड़े भाई औबेदुल्ला खान के पुत्र रशीदुजफर खान की मृत्यु के बाद बेगम सुरैया रशीद के पुत्रों ने भी नवाब संपत्ति पर अपना हक जताया है।

- हमीदुल्ला खान व मेमुना खान की तीन बेटियों-आबिदा, साजिदा, राबिया सुल्तान के पोते।

- राबिया के बाद शायजा सुल्तान व नासिर मिर्जा (गुजर गए) के पुत्र नासिर और यासिर मिर्जा।

- फायजा सुल्तान व अकबर खान ने भी अपने हक के लिए याचिका दायर की है।

अंतिम बहस के बाद होगा फैसला मामले में 10 फरवरी को सुनवाई के बाद यह मामला अंतिम सुनवाई के लिए लग गया है। सभी तरह की आपत्ति और आवेदनों को सुनने के लिए एक अंतिम बहस होगी। इसके बाद इस मामले में फैसला हो जाएगा।

शत्रु संपत्ति की जद में आ जाएगी शहरयार की प्रॉपर्टी

साल 1968 में केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम लाया था। इस कानून के 47 साल बाद कस्टोडियन ऑफ एनीमी प्रॉपर्टी ऑफिस ने भोपाल नवाब की कुछ संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित किया था। शत्रु संपत्ति कार्यालय मुंबई ने युद्घ के समय पाकिस्तान जाने वाली नवाब की बेटी आबिदा सुल्तान को वारिस मानते हुए उनकी चार दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी की लिस्ट भेजी थी। इसमें पाक जाकर बसीं आबिदा सुल्तान को बेगम ऑफ भोपाल मानते हुए इस प्रॉपर्टी की जांच के निर्देश दिए थे। इसमें 70 साल के खसरों की जांच कर जो रिपोर्ट तैयार गई है, उसमें मात्र 24 निर्माण सामने आए हैं।

15,000 हेक्टेयर से अधिक है संपत्ति

भोपाल शहर और इसके आसपास करीब 15,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन नवाब हमीदुल्ला खान के बाद साजिदा सुल्तान के नाम कर दी गई थी। नूर-उस-सबाह होटल, फ्लैग हाउस, कॉटेज-1, 12 क्वार्टर, दार-उस-सलाम, बंगलो ऑफ हबीब, कॉटेज-9, फोर-क्वार्टर, मोटर गैराज, वर्कशॉप, न्यू कॉलोनी क्वार्टर, बंगला नंबर-1 न्यू कॉलोनी, डेयरी फॉर्म क्वार्टर, सर्वेट क्वार्टर खानूगांव, फारस खाना, फॉरेस्ट स्टोर, पैलेस सब पोस्ट ऑफिस, डिस्पेंसरी के आसपास के कमरे, पुलिस गार्ड रूम, पुलिस क्वॉर्टर्स, इंजीनियरिंग स्टोर, गवर्नमेंट डिस्पेंसरी, गवर्नमेंट स्कूल, कोहेफिजा प्रॉपर्टी, अहमदाबाद पैलेस, नानी की कोठी सहित अन्य कृषि भूमि शामिल है। इतना ही नहीं लाहौर व अन्य देशों में नवाब खानदान की संपत्तियों व शेयर में भी अपना हिस्सा मांगा गया है।  

Posted By: Krishna Bihari Singh

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