रायपुर, एएनआइ। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के द्वारा प्लासिटक के उपयोग पर रोक लगाने के बाद लोगों में धीरे-धीरे जागरुकता पैदा हो रही है। अब छत्तीसगढ़ में वन विभाग ने प्लास्टिक की बोतलों को पौधे लगाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। 

जिला वन विभाग की एक पहल के तहत इस पर्यावरण-अनुकूल उपाय के माध्यम से रोजगार प्राप्त करने वाली महिला श्रमिकों की मदद से रामानुजगंज नर्सरी में पौधे रोपने और उगाने के लिए बेकार प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल किया जा रहा है।

नर्सरी में काम करने वाली महिलाओं में से एक अमरलता मिंज ने कहा कि हम बोतलों को शहरों से इकट्ठा करते हैं और यहां लाते हैं। बोतलों को तब काटा जाता है और इसे उपजाऊ मिट्टी के साथ दाखिल करके एक पौधा लगाया जाता है। इस दौरान बोतल के अन्य भागों का भी उपयोग किया जाता है। 

बता दें कि प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के बाद इस प्रथा को अपनाया गया था और इसलिए इस्तेमाल की जाने वाली बोतलों को संरक्षित करने और एक पौधा उगाने के लिए पेश किया गया था।

नर्सरी के प्रबंधक ललन सिन्हा ने  बताय कि प्रशासन द्वारा पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के बाद हमने इस नई तकनीक को अपनाया है जिसमें बोतलें यहां लाई जा रही हैं। वे इसे या तो अपने घरों में या यहाँ बनाते हैं। वे बोतल को काटते हैं और एक तार को पास करने के लिए दो छेद बनाते हैं। मिट्टी, गाय के गोबर और खाद को बोतल में रखा जाता है, उसमें साबून डाला जाता है और इसे अच्छी तरह से ढक दिया जाता है। 

जिला वन अधिकारी प्रणय मिश्रा द्वारा इस पहल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका मानना है कि पौधे के संरक्षण और बढ़ते पौधों की पर्यावरण के अनुकूल पद्धति भी क्षेत्र की महिलाओं के लिए राजस्व का स्रोत बन रही है।

उन्होंने कहा कि हमने पुरानी प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग के साथ लगभग 3000 ऐसे फूलों के बर्तन तैयार किए हैं। हम इस काम में नियोजित महिलाओं के लिए राजस्व उत्पन्न करने के लिए इन पौधों को बेचने की योजना बनाते हैं।

Posted By: Pooja Singh

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