नई दिल्ली, आइएएनएस। देश के उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आर्किटेक्ट समुदाय से ग्रीन आर्किटेक्चर अपनाने और भविष्य की भवन परियोजनाओं में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। वे शनिवार को नेशनल कन्वेंशन ऑफ द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स : आइआइए नैटकॉन, 2020 को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसी भी इमारत में सौंदर्य बोध और स्थायित्व के बीच सही संतुलन की जरूरत पर बल दिया।

सिंधु घाटी सभ्यता से कोनार्क के सूर्य मंदिर और फिर आधुनिक काल तक भारतीय वास्तु एवं स्थापत्य कला के विकास का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा कि हमारा देश ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों का देश है। इन सभी में वास्तु व शिल्पकारों ने स्थानीय सामग्रियों और तकनीकों का प्रयोग किया है। उप-राष्ट्रपति ने देसी व समावेशी स्थापत्य के निर्माण का आह्वान करते हुए कहा कि इस विधा के पेशेवरों को भारत की विविध वास्तु व स्थापत्य कला से प्रेरणा लेने और पर्यावरण-हितैषी तकनीकों पर काम करते हुए विरासत को आगे ले जाने की जरूरत है।

पीएम ने राष्ट्र को समर्पित की एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना शुक्रवार को राष्ट्र को समर्पित किया। 750 मेगावाट की यह विशाल परियोजना मध्य प्रदेश के रीवा में स्थित है। इस परियोजना से दिल्ली मेट्रो सहित रीवा और उसके आस-पास के समूचे क्षेत्र को बिजली की आपूíत की जाएगी। क्लीन इनर्जी की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने सोलर पैनल, बैटरी और दूसरे संयंत्र भारत में ही बनाने को प्रोत्साहित किया। मोदी ने कहा कि सौर ऊर्जा श्योर, प्योर और सिक्योर है और इस क्षेत्र में भारत की अनुकरणीय प्रगति दुनिया के लिए दिलचस्पी की एक बड़ी वजह होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों के कारण, भारत को स्वच्छ ऊर्जा का सबसे आकर्षक बाजार माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आइएसए) को सौर ऊर्जा के मामले में पूरी दुनिया को एकजुट करने के मकसद से शुरू किया गया था। 

Posted By: Shashank Pandey

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