नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली में दिसंबर के मध्य में ही कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट का सामुदायिक प्रसार शुरू हो गया था। युवा इससे अधिक संक्रमित हो रहे हैं। यह वायरस टीके और प्राकृतिक संक्रमण से मिली प्रतिरोधकता को चकमा दे रहा है। यही वजह है कि 87.8 प्रतिशत लोगों को कोरोना की दोनों डोज लगने के बाद भी ओमिक्रोन का संक्रमण हुआ। यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) के डाक्टरों द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह मेड्रक्सिव जर्नल में आनलाइन प्रकाशित किया गया है।

अध्ययन की खास बातें

  • 18 से 60 साल की उम्र के संक्रमित पाए गए लोग- 68.9 प्रतिशत
  • दोनों डोज टीका लेने के बावजूद संक्रमित हुए लोग- 80.6 प्रतिशत
  • पहले संक्रमण होने के बावजूद दोबारा संक्रमण- 12.9 प्रतिशत
  • डेल्टा से संक्रमित होने वाले मरीजों में मृत्यु दर- 1.2 प्रतिशत

95 प्रतिशत मरीजों में ओमिक्रोन

आइएलबीएस के डाक्टरों के अनुसार, अब हाल में हुई जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में कोरोना से संक्रमित करीब 95 प्रतिशत मरीजों में ओमिक्रोन का संक्रमण पाया जा रहा है। दिल्ली में ओमिक्रोन का पहला मामला पांच दिसंबर को सामने आया था।

264 मरीजों के सैंपल पर अध्ययन

लिहाजा, आइएलबीएस में माइक्रोबायोलाजी की विशेषज्ञ डा. एकता गुप्ता के नेतृत्व में आइएलबीएस के डाक्टरों ने 25 नवंबर से 23 दिसंबर के बीच दिल्ली के पांच जिलों (दक्षिण, दक्षिण पूर्व, दक्षिण पश्चिम, पूर्व व पश्चिमी दिल्ली) से जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए 264 मरीजों के सैंपल पर अध्ययन किया गया। इसमें 68.9 प्रतिशत (182) सैंपल में डेल्टा और 31.06 प्रतिशत (82) मरीजों में ओमिक्रोन के संक्रमण की पुष्टि हुई।

60.9 प्रतिशत मरीजों को समुदाय से संक्रमण

अध्ययन में कहा गया है कि ओमिक्रोन से संक्रमित 39.1 प्रतिशत विदेश से यात्रा करके आए थे या विदेश से आए लोगों के संपर्क में आने से बीमार हुए थे। 60.9 प्रतिशत मरीजों को समुदाय से संक्रमण हुआ। उन्होंने विदेश यात्रा नहीं की थी। दिल्ली में करीब 90 प्रतिशत लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबाडी बन गई थी। ज्यादातर लोगों को टीका भी लग चुका है। इसलिए कोरोना का संक्रमण इतना अधिक बढ़ने की आशंका नहीं थी।

ओमिक्रोन से संक्रमित पाए गए मरीजों की स्थिति

  • बगैर लक्षण वाले मरीज- 61 प्रतिशत
  • दोनों डोज टीका लेने के बावजूद संक्रमण- 87.8 प्रतिशत
  • कोविशिल्ड टीका जिन्हें लगा था- 56 प्रतिशत
  • कोवैक्सीन का टीका जिन्हें लगा था- 12 प्रतिशत
  • विदेश में जिन्हें एमआरएनए टीका लगा था- 15 प्रतिशत
  • विदेश में कोई अन्य टीका लगा था- 5 प्रतिशत
  • ओमिक्रोन से संक्रमित मरीज जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी- 3.6 प्रतिशत

देश में ओमिक्रोन पर पहला शोध

फिर भी ओमिक्रोन का संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ा। अस्पताल के डाक्टरों का दावा है कि यह देश में पहला शोध पत्र है, जिसके माध्यम से ओमिक्रोन का सामुदायिक प्रसार और मरीजों पर उसके प्रभाव की स्थिति सामने आई है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक ओमिक्रोन का संक्रमण दो प्रतिशत से कम था, जो दिसंबर के तीसरे सप्ताह के बाद 54 प्रतिशत पहुंच गया था और अब यह 95 प्रतिशत मरीजों में पाया जा रहा है।