FCRA बिल पर JPC अध्यक्ष का बयान: देश के कुल विदेशी चंदे में चर्च व धार्मिक संगठनों की हिस्सेदारी केवल छह प्रतिशत
संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि देश में मिलने वाले कुल विदेशी चंदे में ...और पढ़ें

देश के कुल विदेशी चंदे में चर्च व धार्मिक संगठनों की हिस्सेदारी केवल छह प्रतिशत।
HighLights
JPC अध्यक्ष ने बताया, चर्चों को कुल विदेशी चंदे का 6% मिलता है।
सरकार का उद्देश्य विदेशी अंशदान को पारदर्शी तरीके से विनियमित करना है।
समिति हितधारकों से मिलने चेन्नई और कोच्चि में बैठकें करेगी।
डिजिटल डेस्क, शिलॉग। विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि देश में मिलने वाले कुल 22 हजार करोड़ रुपये के विदेशी चंदे में से चर्च और अन्य धार्मिक संगठनों की हिस्सेदारी मात्र छह प्रतिशत है। शिलांग में आयोजित समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह जानकारी दी।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इस विधेयक के कुछ प्रविधानों से ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यक संचालित सामाजिक व शैक्षणिक संस्थानों का वैध विदेशी फंड प्रभावित हो सकता है। इसके विपरीत, सरकार का कहना है कि यह प्रस्तावित कानून किसी विशेष धर्म को लक्षित नहीं करता है, बल्कि इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान को पारदर्शी तरीके से विनियमित करना है।
जायसवाल ने कहा, "हमारी रुचि राष्ट्रीय हित में है। हम किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित हितधारकों की बात सुन रहे हैं और व्यावहारिक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान चाहते हैं।"
ईसाई बहुल राज्य मेघालय के मुख्यमंत्री कानराड के. संगमा के विशेष आग्रह पर शिलांग में इस बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें चर्चों, हिंदू समूहों और स्वदेशी समुदायों से जुड़े लगभग 20 संगठनों ने हिस्सा लिया। वर्तमान एफसीआरए ढांचे के तहत राज्य स्तरीय अधिकारियों की शक्तियों और संगठनों द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का परीक्षण किया जा रहा है।
समिति अब हितधारकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए चेन्नई और कोच्चि में परामर्श बैठकें आयोजित करेगी। गौरतलब है कि संसद ने 12 अगस्त को विपक्ष के विरोध के बीच इस संशोधन विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजा था।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)