हैदराबाद, प्रेट्र। पिछले साल जून में पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी में चीन के साथ संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्नल संतोष बाबू के पिता बी. उपेंद्र ने कहा है कि उनके बेटे ने जिस वीरता का प्रदर्शन किया उसके लिए उसे सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार परमवीर चक्र के लिए नामित किया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मैं नाखुश हूं, लेकिन मैं 100 फीसद संतुष्ट भी नहीं हूं।' गणतंत्र दिवस पर सरकार ने संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की है।

बी. उपेंद्र ने कहा कि उनके बेटे द्वारा दिखाई गई वीरता ने कई लोगों को प्रेरणा दी है, जिनमें सुरक्षा बलों में काम कर रहे लोग शामिल हैं। उनका बेटा जहां तैनात था, उस इलाके की जलवायु संबंधी चुनौतियों पर काबू पाकर उसने चीनी सैनिकों से लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा, 'मेरे बेटे और उसके लोग खाली हाथ लड़े। दुश्मन के ज्यादा सैनिकों को मारकर उसने साबित किया कि भारत चीन से श्रेष्ठ और ताकतवर है।'

उनके मुताबिक, कर्नल बाबू के परिवार को विभागीय लाभों से ज्यादा कुछ नहीं मिला, जो सामान्यत: शहीद सैनिकों के परिवारों को केंद्र से प्राप्त होते हैं। ज्ञात हो कि तेलंगाना सरकार ने संतोष बाबू के परिवार को पांच करोड़ रुपये के अलावा उनकी पत्नी को ग्रुप-1 का पद और एक रिहायशी भूखंड प्रदान किया है। पिछले साल 15 जून को संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान करने की घोषणा की है। महावीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। 

पुलवामा में हुए हमले से पहले आतंकियों की विस्फोटकों से भरी कार का पीछा करके उन्हें रोकने की कोशिश में अपनी जान न्योछावर करने वाले सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मोहन लाल को वीरता के लिए सर्वोच्च पुलिस पदक प्रदान करने की घोषणा की गई है।

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