फर्जी दावे और 5.3 करोड़ रुपये की जमीन के मामले में हेराफेरी... आईटी विभाग के जाल में फंसे दंपति
आयकर विभाग ने एक आईटी प्रोफेशनल दंपति के खिलाफ 5.3 करोड़ रुपये के फर्जी दावे और टैक्स चोरी के मामले में कार्रवाई की है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
HighLights
आईटी पेशेवर दंपति ने 5.3 करोड़ के फर्जी दावे किए।
फर्जी राजनीतिक चंदा, होम-एजुकेशन लोन ब्याज का दावा।
धोखाधड़ी से अर्जित धन से कई संपत्तियां खरीदीं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आयकर विभाग ने गलत दावे करने वालों को सख्त संदेश देते हुए एक आईटी प्रोफेशनल और उनकी पत्नी के खिलाफ एक विशेष तलाशी अभियान चलाया। विभाग के अनुसार, इस जोड़े ने पांच वर्षों में 5.3 करोड़ रुपये के फर्जी दावे किए और टैक्स की चोरी की।
इस जोड़े पर दस्तावेज जाली बनाने के आरोप भी हैं। टैक्स अधिकारियों ने पाया कि डिडक्शन के दावों में फर्जी राजनीतिक चंदा, होम लोन और एजुकेशन लोन पर ब्याज शामिल था, जबकि किराये से होने वाली आय को छिपाया गया था।
खरीदी आधा दर्जन से ज्यादा संपत्तियां
उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल करके आधा दर्जन संपत्तियां खरीदी थीं। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्नी ने अपने टैक्स रिटर्न में एक राजनीतिक दल को दिए गए चंदे के नाम पर 40 लाख रुपये से अधिक की कटौती का दावा किया।
उनके फॉर्म 16 में लगभग 1.2 लाख रुपये की कटौती दिखाई गई थी, जबकि रिटर्न में अतिरिक्त कटौती का दावा किया गया था। जब उस राजनीतिक दल से इस दावे की पुष्टि की गई तो अधिकारियों को पता चला कि करदाता ने वास्तव में केवल 50 रुपये का चंदा दिया था, जिसके लिए एक रसीद जारी की गई थी।
डिजिटल तरीके से बनाए फर्जी दस्तावेज
जांचकर्ताओं ने पाया कि उस रसीद को डिजिटल तरीके से बदल दिया गया था और 40 लाख रुपये से अधिक के चंदे के दावे को सही साबित करने के लिए कई फर्जी रसीदें तैयार की गई थीं। लेकिन दिल्ली-एनसीआर में रहने वाला यह जोड़ा आसानी से हार मानने वाला नहीं था।
जांच के दौरान जब उन्हें बुलाया गया तो रिटर्न फाइल करने वाले पति ने न केवल बदली हुई रसीदें पेश कीं, बल्कि अपने दावे के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट भी जमा किए। अधिकारियों ने बैंक से इन स्टेटमेंट की पुष्टि करनी चाही, क्योंकि लेनदेन के आंकड़े मेल नहीं खा रहे थे। लोन के भुगतान, क्रेडिट कार्ड के भुगतान और बैंक ट्रांसफर (जिसमें उनके अपने खातों में किए गए ट्रांसफर भी शामिल थे) को राजनीतिक चंदे के रूप में दिखाने के लिए जाली तरीके से पेश किया गया था।
इस जोड़े ने येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन के ब्याज पर लगभग 3 करोड़ रुपये का क्लेम किया था। इसके लिए एक ब्याज प्रमाण पत्र जमा किया गया था। जांच के दौरान, अधिकारियों को पता चला कि इस जोड़े के परिवार का कोई भी सदस्य कभी येल यूनिवर्सिटी में नहीं पढ़ा था और वह प्रमाण पत्र चैटजीपीटी का इस्तेमाल करके तैयार किया गया था।
हाउसिंग लोन का फर्जी दावा
इस जोड़े ने एक फर्जी हाउसिंग लोन का दावा भी किया था। दोनों ने खुद को एक ही प्रॉपर्टी का इकलौता मालिक बताया था, जबकि अब उन्होंने मान लिया है कि यह प्रॉपर्टी उनकी संयुक्त संपत्ति थी। उनके दावों के उलट, यह प्रॉपर्टी हमेशा किराए पर दी गई थी, न कि वे खुद इसमें रहते थे।
अपने टैक्स रिटर्न में एक जीवनसाथी ने शून्य किराये की आय और 2 लाख रुपये के ब्याज भुगतान का दावा किया था, जबकि दूसरे ने 5 लाख रुपये तक की ब्याज आय का दावा किया था। चूंकि अब टैक्स रिटर्न में व्यक्तियों को लोन अकाउंट नंबर और बैंक की जानकारी देनी होती है, इसलिए एक मामले में बैंक का नाम बदल दिया गया और लोन की राशि बढ़ाकर 6 करोड़ रुपये कर दी गई, जिस पर 8 लाख रुपये के ब्याज का दावा किया गया।
जांच से पता चला कि लोन 2015 में ही चुका दिया गया था, जबकि जांच के दायरे में आए दावे वित्त वर्ष 2021-22 से शुरू होने वाली अवधि से जुड़े थे। इस दौरान संपत्ति से 10-16 लाख रुपये का किराया आ रहा था। इस दंपति से निपटना आसान नहीं रहा है।
जब उनके मामले की पहली बार जांच शुरू हुई, तो पति ने धारा 80GGC के तहत राजनीतिक चंदे के डिडक्शन दावे को बिना अपना दावा वापस लिए धारा 80G के तहत चैरिटी को दिए गए चंदे में बदल दिया। अब इस दंपति को जुर्माने और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
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