घाटकोपर (महाराष्ट्र) एजेंसी। मुंबई के घाटकोपर की दो बहनें वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और नीले ट्रैफिक लाइट के साथ ईंधन के संरक्षण के लिए एक अनूठा समाधान लेकर आई हैं। ये लाइट चालकों को अपने इंजन को बंद करने के लिए मजबूर करेगी। शिवानी खोत और उनकी बहन ईशा खोत वायु प्रदूषण को रोकने और ईंधन के संरक्षण के लिए एक समाधान निकालकर लाई हैं। एक नीली ट्रैफिक लाइट, जो लाल बत्ती के आने के 10 सेकंड बाद जलेगी और लाल बत्ती के 10 सेकंड पहले बंद भी हो जाएगी। इस अवधि के दौरान ड्राइवरों को अपना इंजन बंद करना होगा।

मीडिया से बात करते हुए, शिवानी खोत ने कहा, 'वायु प्रदूषण एक ताजा विषय है और जीवन के लिए बहुत खतरनाक है। हमने वायु प्रदूषण के कारण कई मौतें देखी हैं। हाल ही में प्रदूषण के कारण देश की राजधानी में स्थिति सबसे खराब है। नीली रोशनी की यह अवधारणा प्रदूषण पर अंकुश लगाने में मदद और इसे हर सिग्नल पर लगाने के लिए लगभग आठ हजार रुपये का खर्च आएगा, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इस प्रदूषण के कारण हम हर दिन बहुत कुछ खो रहे हैं जो ईंधन के जलने के कारण होता है।     

उन्होंने आगे कहा कि हम व्यक्तिगत रूप से लोगों को इंजन बंद करने का सुझाव देते हैं जब लाल बत्ती होती है और लोगों ने अब तक इस अवधारणा पर पॉजिटिव रिस्पांस किया है। ईशा खोट ने कहा कि हम ईंधन और कार को जलाने में बर्बाद हो रहे मूल्य की तुलना में ये वास्तव में बहुत सस्ता हैं। हमने एक नई लोइट पेश की है जो नीले रंग की है जो आपको इंजन बंद करने के लिए संकेत देगी। हमारे पास सिग्नल पर तीन लाइट हैं - लाल, हरा और पीला और हम इसके आदी हो गए हैं। इसी तरह हम धीरे-धीरे इस ब्लू लाइट के भी आदी हो जाएंगे। 

शिवानी ने आगे कहा कि हमने यहां घाटकोपर में जिजामाता ट्रैफिक जंक्शन पर एक सर्वेक्षण किया है, जहां हमने गणना की कि हर दिन 156 लीटर ईंधन खत्म हो जाता है और हर सिग्नल में 371 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति दिन उत्सर्जित हो रहा है। अगर हम देखें तो इसका बड़ा असर दिल्ली में हुआ, जिसमें पाया गया कि अकेले दिल्ली में 250 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए हैं, इसलिए आप देख सकते हैं कि यह प्रभाव बड़ा है।

Posted By: Ayushi Tyagi

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