यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जानिए दुनिया की दो सर्वाधिक आबादी वाले देश भारत और चीन की परीक्षा व्यवस्था में है कितना अंतर
भारत के बिहार राज्य का यह दृश्य राजकीय बोर्ड परीक्षाओं की पोल खोलता है, तो दूसरी तरफ चीन में ईमानदारी ...और पढ़ें

नई दिल्ली (जेएनएन)। ये दो दृश्य दुनिया के दो सर्वाधिक आबादी वाले देशों में परीक्षाओं की कहानी बयां करते हैं। भारत के बिहार राज्य का यह दृश्य राजकीय बोर्ड परीक्षाओं की पोल खोलता है, तो दूसरी तरफ चीन में ईमानदारी से परीक्षाएं कराने के लिए चौकस सुरक्षा व्यवस्था नजर आती है।

हाल ही में सीबीएसई के पर्चे लीक होने की घटना ने भारतीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चीनी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो, इसके लिए चीनी प्रशासन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाता है। इसमें स्वॉट टीम द्वारा कड़ी निगरानी करने से लेकर दोषियों को जेल में डालने का प्रावधान भी शामिल है। यही वजह है कि चीन की बोर्ड परीक्षाओं को दुनिया में सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है।

कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी
परीक्षाओं में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, यह सुनिश्चित करना सिर्फ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं है। शिक्षा मंत्रालय के साथ नागरिक सुरक्षा व राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय, राज्य इंटरनेट सूचना कार्यालय, राज्य की गोपनीय बातों को गुप्त रखने के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण, सर्वोच्च न्यायालय और पुलिस भी इसमें जवाबदेह होती है। सरकार ने जनता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जिसपर लोग परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली की जानकारी दे सकते हैं।

सजा का प्रावधान
इन सब सुरक्षा प्रणालियों के बाद भी अगर कोई छात्र या शिक्षक परीक्षा पत्र लीक करता या फिर परीक्षा के दौरान नकल करते/कराते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे सात वर्ष के लिए जेल में डालने का प्रावधान है।
त्रिस्तरीय जांच
कई प्रांतों में परीक्षा केंद्रों के पास नाकाबंदी करके त्रिस्तरीय जांच की जाती है। इसमें चेहरे का मिलान, फिंगरप्रिंट का मिलान और मेटल डिटेक्टरों से जांच शामिल है। छात्र व शिक्षक दोनों को इन जांचों से गुजरना पड़ता है।

स्वॉट दस्ते
चीन ने पहली बार स्वॉट दलों को भी नियुक्त किया। स्पेशल वीपन एंड टैक्टिक्स नामक दस्ते को परीक्षा केंद्रों तक परीक्षा पत्र ले जाने के लिए तैनात किया गया। हर परीक्षा केंद्र पर कम से कम आठ पुलिस वाले भी तैनात किए गए।
चीन ऐसे रोकता है नकल, तकनीक का इस्तेमाल
- चीन के शिक्षा मंत्रालय ने जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया। इसके जरिए नजर रखी जाती है कि परीक्षा पत्र सुरक्षापूर्वक परीक्षा केंद्रों तक पहुंच जाएं।
- बायोमेट्रिक तकनीक जिसमें सिर्फ फिंगरप्रिंट नहीं बल्कि उससे आगे बढ़कर जांच की जाती है। परीक्षार्थियों को इसमें कई तरह की जांच से गुजरना पड़ता है।
- परीक्षा केंद्रों के ऊपर 500 मीटर की ऊंचाई पर ड्रोन चक्कर काटते हैं, जिससे किसी भी तरह के रेडियो सिग्नल को पकड़ा जा सके। कई छात्र नई तकनीकों के इस्तेमाल से नकल करते हैं।
