'सत्ता कौन चेक करता है', सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने चुनाव आयोग में नियुक्तियों के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अभय ओका ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचे की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अभय ओका। (फाइल फोटो।)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अभय ओका ने एक ऐसे कानूनी ढांचे की मांग की है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए स्वतंत्र संस्थाओं का होना बहुत जरूरी है।
रविवार को ठाणे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और हम विषय पर आयोजित एक व्याख्यान में बोलते हुए सेवानिवृत्त जस्टिस ओका ने संवैधानिक नियुक्तियों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मौजूद सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए और एक अधिक स्वतंत्र चयन प्रक्रिया की मांग की।
आडवाणी द्वारा लाए गए सिस्टम का जिक्र
ओका ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा दिए गए कॉलेजियम सिस्टम के प्रस्ताव का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, "पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने लगभग 14 साल पहले एक कॉलेजियम सिस्टम का प्रस्ताव दिया था। इसमें प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते, ताकि एक पूरी तरह से स्वतंत्र चयन प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।"
'स्पष्ट कानूनी प्रावधान होने चाहिए'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर ज्ञानेंद्र कुमार जैसे किसी चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटा दिया जाए तो क्या होगा? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी नियुक्तियों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान होने चाहिए, ताकि संस्थागत स्वतंत्रता बनी रहे।
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के महत्व को दोहराते हुए ओका ने कहा कि लोकतंत्र के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने विचार और दृष्टिकोण व्यक्त करने की आजादी होनी चाहिए और असहमति को हिंसा के बजाय बहस के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "हमारे देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना जीवन अपना अर्थ खो देता है।"
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