'फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग, सर्वसम्मति से हुए सभी फैसले', चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या कहा?
आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और फॉर्म छह में कोई संशोधन नहीं किया गया है, घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज है।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या कहा।
HighLights
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया।
मतदाता सूची पुनरीक्षण के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए।
फॉर्म छह में कोई संशोधन नहीं, घोषणा-पत्र अलग।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद पर भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा निर्णय लेने के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म छह में कोई संशोधन नहीं किया गया है। SIR के दौरान लिया जाने वाला घोषणा-पत्र इससे अलग दस्तावेज है।
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को राकेश कुमार सिंह की याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया। सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगा। जाहिर है कि इस हलफनामे के बाद वे सारे विवाद खत्म ही सकते हैं जिसे लेकर हंगामा था, जबकि SIR की वैधता को कोर्ट पहले ही घोषित कर चुका है।
याचिका में सीईसी के कामकाज और SIR से जुड़े कुछ फैसलों की वैधता को चुनौती दी गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दायर इसी तरह की याचिका भी लंबित है, जिसे अदालत ने इस मामले के साथ सुनवाई के लिए जोड़ दिया था।
तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए फैसले
उप चुनाव आयुक्त प्रकाश येतुरु की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि SIR से संबंधित 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेश सर्वसम्मति से जारी किए गए। हलफनामे को भी मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि फाइलों पर विचार के दौरान दर्ज नोट, सुझाव, सवाल और टिप्पणियां अपने आप में अंतिम निर्णय नहीं होते। सामान्य प्रक्रिया के तहत फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास भेजी जाती है।
आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा कि फैसले वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए। इस प्रविधान के अनुसार, जहां तक संभव हो, निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए। सहमति नहीं बनने पर बहुमत से फैसला किया जा सकता है।
फॉर्म छह और घोषणा-पत्र अलग-अलग
आयोग ने कहा कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। SIR के दौरान लिया जाने वाला घोषणा-पत्र अलग दस्तावेज है, जिसका उद्देश्य आवेदक के विवरण का पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान करना है।
हलफनामे के मुताबिक, ऑनलाइन आवेदन के दौरान घोषणा-पत्र दिखाने के तरीके से फॉर्म छह में बदलाव किए जाने का भ्रम पैदा हो सकता है। इसे दूर करने के लिए 21 अक्टूबर 2026 से फॉर्म छह और SIR घोषणा-पत्र को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
आयोग ने बताया कि पुराने रिकॉर्ड में नाम नहीं मिलने पर मतदाताओं को सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेंगे।
व्यक्तिगत सुनवाई असाधारण परिस्थितियों में ही होगी। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए सक्षम निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) का आदेश अनिवार्य होगा। ईसीआईनेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए आईआईटी मद्रास और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के विशेषज्ञों की समिति भी बनाई गई है।
सीईसी को हटाने की प्रक्रिया का हवाला
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग पर आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया। इसके तहत सीईसी को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। पांच अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने सीईसी को तत्काल निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया था, लेकिन कहा था कि संबंधित फैसलों की जांच की जाएगी।
विवाद एक अंग्रेजी दैनिक की रिपोर्ट के बाद उठा था। इसमें दावा किया गया था कि SIR से जुड़े 14 फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद आयोग के नाम पर लिए गए। आयोग ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि याचिका अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है और तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।
आयोग ने यह भी कहा कि उसने कोई आंतरिक नोट या फाइल मीडिया को जारी करने की अनुमति नहीं दी थी। इन्हीं दलीलों के आधार पर उसने याचिका खारिज करने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलीलें
- SIR से जुड़े आंतरिक नोटों और टिप्पणियों से आयोग ने इन्कार नहीं किया, लेकिन कहा कि इन्हें आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
- मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों के सवाल, सुझाव और टिप्पणियां आयोग के औपचारिक निर्णय नहीं हैं।
- याचिकाकर्ता ने आंतरिक रिकॉर्ड के आधार पर जो निष्कर्ष निकाले हैं, आयोग ने उन्हें खारिज किया।
- आयोग ने कहा कि किसी आंतरिक नोट या फाइल को किसी समाचार एजेंसी को जारी नहीं किया गया और न ही इसकी अनुमति दी गई।
- आयोग में तीन सदस्यों की व्यवस्था का उद्देश्य मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेना भी है।
- आयोग ने SIR संबंधी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताते हुए याचिका खारिज करने का अनुरोध किया।
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