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मरे हुए खाताधारक के खाते से निकाले 40 लाख रुपये, मैसूर के पूर्व SBI मैनेजर को हुई जेल

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:51 AM (IST)

मैसूर की एक अदालत ने एसबीआई के पूर्व चीफ मैनेजर ए.वी. कुलकर्णी को धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया है।

एसबीआई के पूर्व मैनेजर को अदालत ने सुनाई सजा। (प्रतीकात्मक तस्वीर।)

एसबीआई के पूर्व मैनेजर को अदालत ने सुनाई सजा। (प्रतीकात्मक तस्वीर।)

HighLights

  1. मैसूर के पूर्व एसबीआई मैनेजर ए.वी. कुलकर्णी दोषी करार।

  2. मृत खाताधारक और बैंक खाते से 61.57 लाख रुपये की धोखाधड़ी।

  3. एक साल की सख्त कैद और 50,000 रुपये का जुर्माना लगा।

डिजिटल डेस्क, मैसूर। मैसूर की एक अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक पूर्व चीफ मैनेजर को दोषी ठहराया है। उन पर 2005 में मृत खाताधारक के खाते से धोखाधड़ी करके 40.53 लाख रुपये और बैंक के एक इंटरनल खाते से 21.04 लाख रुपये ट्रांसफर करने का आरोप था।

अदालत ने उन्हें एक साल की सख्त कैद की सजा सुनाई और 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। आरोपी एवी कुलकर्णी अपराध के दौरान (13 मई 2009 से 23 दिसंबर 2011 के बीच) मैसूर में एसबीआई की चामुंडीपुरम ब्रांच में चीफ मैनेजर के तौर पर कार्यरत थे।

इंटरनल बैंक अकाउंट से भी ट्रांसफर किए लाखों रुपये

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुलकर्णी ने दिवंगत कृष्णा अय्यर के खाते से 40.53 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जिनकी मृत्यु अप्रैल 2005 में हो गई थी। उन्होंने बैंक के एक इंटरनल अकाउंट से भी 21.04 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जिससे कुल रकम 61.57 लाख रुपये हो गई। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ये पैसे कुलकर्णी और उनके बेटे के बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए और बाद में निकाल लिए गए।

कुलकर्णी ने मानी पैसे निकालने की बात

बैंक के सीनियर अधिकारियों की आंतरिक जांच के दौरान गड़बड़ियों का पता चला। जांच के दौरान, कुलकर्णी ने कथित तौर पर पैसे निकालने की बात मानी और बाद में बैंक को लगभग 62 लाख रुपये लौटा दिए। जांच के बाद मैसूरु पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।

अदालत ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद मैसूरु की पहली अतिरिक्त सीजेएम कोर्ट के जज प्रकाश वी ने 25 सितंबर को फैसला सुनाया। अदालत ने कुलकर्णी को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत दोषी पाया और उन्हें एक साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से 40,000 रुपये बैंक को मुआवजे के तौर पर दिए जाएं।

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