नई दिल्ली, प्रेट्र। अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने के लिए जरूरी प्रौद्योगिकी विकसित जा चुकी है। इस दिशा में क्रू मॉडल, पर्यावरण नियंत्रण, स्पेश शूट और लाइफ सपोर्ट सिस्टम जैसी प्रणाली लगभग तैयार हैं। यह बात भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के सिवन ने कही। उनका यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के लालकिले से 2022 तक अंतरिक्ष में भारत द्वारा 'गगनयान' नाम से मानव मिशन भेजने की घोषणा के बाद आया है।

सिवन ने कहा कि 2022 में 'गगनयान' को रवाना करने से पहले इसरो जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल (जीएसएलवी) मार्क-3 का इस्तेमाल करते हुए दो मानवरहित मिशन और यान को अंतरिक्ष में भेजेगा। इस संबंध में 60-70 फीसद काम पहले ही पूरा हो चुका है। जब उनसे इस मिशन पर आने वाले खर्च के संबंध में पूछा गया तो कहा कि 10,000 करोड़ रुपये से कम खर्च पर यह संभव हो सकेगा। भेजे जाने वाला यान चार से पांच टन वजनी होगा।

तीन लोग जा सकते हैं
सिवन ने कहा कि यह परियोजना हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान को बढ़ाने का काम करेगी। इस राष्ट्रीय परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करना इसरो के लिए चुनौती होगा। इसे पूरा कराने में बहुत से संगठन, शैक्षिक संस्थान और औद्योगिक ईकाइयां सहयोग कर रही हैं। जब उनसे इस मिशन के लिए यात्रियों को चुनने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है। हालांकि इसमें तीन लोग जा सकते हैं। 

चौथा देश होगा भारत
मंगलयान के समय इसरो के अध्यक्ष रहे के राधाकृष्णन ने कहा कि गगनयान इसरो के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अगर भारत इसमें सफल होता है तो चौथा देश होगा। बात दें कि वर्ष 2013 में मंगलयान को अंतरिक्ष में भेजा गया था।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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