नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। देश भर में प्रदूषण के खिलाफ छिड़ी मुहिम अब और तेज होगी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर मिशन मोड में काम करने का एलान किया है। साथ ही प्रदूषण से घिरे सभी शहरों को तकनीकी मदद मुहैया कराने के लिए एक राष्ट्रीय नॉलेज नेटवर्क का भी गठन किया है। इसमें अब तक करीब 86 आइआइटी, एनआइटी और विश्वविद्यालयों आदि को जोड़ा गया है, जो अपने आसपास के शहरों को प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने में मदद करेंगे।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की मौजूदगी में शुक्रवार को इस पूरे अभियान की शुरुआत हुई। इस मौके पर आइआइटी दिल्ली के साथ गाजियाबाद एवं नोएडा नगर निगमों ने भी करार किया। तकनीकी संस्थानों के साथ इसी तरह का करार अब नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत चिन्हित सभी 132 शहरों की ओर से भी किया जाएगा।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने कहा कि मौजूदा समय में हर शहर में प्रदूषण के अलग-अलग कारण हैं, ऐसे में इस नई पहल से शहरों को हवाओं को समयबद्ध तरीके से साफ करने में काफी मदद मिलेगी।

वायु प्रदूषण के खिलाफ शहरों में छिड़ी मुहिम में तकनीक संस्थानों की मदद लेने का यह फैसला उस समय लिया गया है, जब प्रदूषण से निपटने के लिए देश भर के सभी शहरों के प्लान में अलग- अलग चुनौतियां देखने को मिलीं हैं। ऐसे में मंत्रालय ने किसी एक तकनीकी संस्थान से मदद लेने के बजाय आस-पास के संस्थानों से ही उन्हें मदद मुहैया कराने की योजना बनाई।

गौरतलब है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत खराब हवा की गुणवत्ता वाले देश के 132 शहरों का चयन किया है। इन शहरों में प्रदूषण के स्तर को 2024 तक बीस से तीस फीसद तक कम करने का लक्ष्य तय किया गया है।

पराली प्रबंधन के लिए पंजाब ने मांगे दो हजार करोड़

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत प्रदूषण से घिरे सभी शहरों को तकनीकी मदद मुहैया कराने के लिए आयोजित कार्यक्रम में पंजाब ने पराली का मुद्दा उठाया। साथ ही पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र से दो हजार करोड़ की सब्सिडी की मांग की। पंजाब के पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पराली उद्योग को पंजाब में तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक आठ-नौ उद्योग लग चुके है। इनमें बिजली बनाने वाले उद्योग भी शामिल हैं।

Edited By: Neel Rajput