नई दिल्ली [अंशु सिंह]। छोटे शहरों में स्टार्ट अप करने की अपनी चुनौतियां होती हैं, लेकिन उद्यमी उन्हीं के बीच से संभावनाएं तलाशते और उद्यम शुरू कर लेते हैं। ‘वर्की’ के संस्थापक सावन लाढा बीते कुछ समय से को-वर्किंग स्पेस में काम कर रहे हैं।

देश के सात शहरों (इंदौर, रायपुर, पुणे, गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, अहमदाबाद) में इनके करीब 30 केंद्र हैं। लेकिन लॉकडाउन में जब सभी ऑफिसेज बंद हो गए, तो इन्होंने वर्क फ्रॉम सर्विस सेक्टर में कदम रखा और ‘वर्की प्लस’ नाम से एक प्रोग्राम लॉन्च किया। इसके अंतर्गत वे लोगों को मासिक किराये पर वर्क टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर, लैपटॉप, यूपीएस, इंटरनेट एवं वाई फाई राउटर आदि उपलब्ध करा रहे हैं। 

सावन बताते हैं, ‘अब तक हम हजार से ज्यादा लोगों की डिमांड को पूरा कर चुके हैं। हम कंपनियों को भी ऐसे टूल्स उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वे घर से काम करने वालों की मॉनिटरिंग कर सकें। फिलहाल, यह सर्विस इंदौर और मुंबई में कुछ स्थानों पर दी जा रही है। आने वाले समय में दिल्ली समेत 10-12 अन्य शहरों में इसे शुरू करने की योजना है।‘ आइटी और उससे जुड़ी हुई कंपनियों को छोड़ दें, तो किसी ने सोचा नहीं था कि एक दिन अचानक से वर्क फ्रॉम सेटअप में काम करना पड़ेगा। इसलिए कोई बैकअप तैयारी नहीं थी। लेकिन उद्यमियों ने उसका समाधान भी निकाल दिखाया। 

बदले माहौल में बदलीं सेवाएं

कॉरपोरेट डिस्काउंट प्लेटफॉर्म ‘एडवांटेज क्लब‘ की संस्थापक एवं सीईओ स्मिति भट्ट की कंपनी, कॉरपोरेट्स को रिवॉर्ड एंड रिकॉग्‍नीशन सॉल्युशन देने के साथ कर्मचारियों को बड़े ब्रांड्स के एक्सक्लूसिव ऑफर्स देती थी। लेकिन अब ये कर्मचारियों को ऑनलाइन हेल्थ कंसल्टेशन सर्विस देने के साथ कंपनियों को फ्यूमिगेशन की सुविधाएं दे रही है। स्मिति बताती हैं, ‘लंबे समय के बाद ऑफिसेज दोबारा से खुल रहे हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर पहले पूरे परिसर को डिसइंफेक्ट करना जरूरी है। इसलिए हम अपने पार्टनर्स की मदद से उन्हें सैनिटाइजर चैंबर सेटअप करने से लेकर कीटनाशकों के छिड़काव तक की सर्विस उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनियां हमारे प्लेटफॉर्म के जरिए सामूहिक कोविड-19 परीक्षण भी करा सकती हैं, जिसके लिए हमने लैब्स के साथ टाईअप किया है। इसके अलावा, हम पीपीई, थर्मल थर्मोमीटर्स जैसे दूसरे किट्स भी उपलब्ध करा रहे हैं।‘ स्मिति को लगता है कि कोविड के बाद वेलनेस एवं इंश्योरेंस सेक्टर पर फोकस पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगा। 

ग्राहकों के घर पहुंचेगा गैराज

डोरस्टेप कार सर्विस एवं रिपेयर प्रोवाइडर कंपनी ‘पिटस्टॉप‘ के संस्थापक मिहिर मोहन मानते हैं कि मौजूदा संकट ने ग्राहकों की अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं को बदल दिया है। इसलिए वे उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई सर्विस शुरू कर रहे हैं। वे बताते हैं, ‘इस लॉकडाउन ने हमारे बिजनेस को काफी हद तक प्रभावित किया। बावजूद इसके, हम कॉल पर लोगों की सर्विसिंग एवं रिपेयरिंग जरूरतों को इमरजेंसी बेसिस पर पूरा कर रहे थे।

अकेले मई महीने में हमने 500 से अधिक गाड़ियों की सर्विसिंग की।‘ इन्होंने ‘रिवाइव‘ नाम से नई सर्विस शुरू की है, जिसके तहत ग्राहकों को जीरो कॉन्टैक्ट डोरस्टेप सर्विस दी जाएगी। मिहिर कहते हैं, ‘हमारे रेट्रो फिटेड डोरस्टेप वैन्स में सैनिटाइजेशन जैसी तमाम सुविधाएं हैं, जिससे गाड़ियों की रिपेयरिंग, सफाई एवं उन्हें कीटाणु मुक्त बनाया जा सकता है। गैरेज जाने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ एप या वेबसाइट पर एक बुकिंग करनी होगी।‘

पटरी पर लौटेगी बिजनेस की गाड़ी

फिनटेक कंपनी ‘बैंकइट‘ के सीओओ अमित कहते हैं, ‘वैश्विक स्तर पर कंपनियों के लिए यह एक मुश्किल दौर रहा है। लेकिन उम्मीद है कि बिजनेस की गाड़ी पटरी पर लौटेगी। हमें एहसास है कि कोविड के बाद की दुनिया बिल्कुल अलग होगी। लोगों के काम करने, यात्रा करने और यहां तक कि पैसे के लेन-देन का तरीका बदल जाएगा। 

इसलिए उसी के अनुरूप भविष्य की रणनीतियां तैयार की जा रही हैं।‘ आने वाले दिनों में प्लेटफॉर्म पर कई नई सेवाएं एवं प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे, जिससे कि देशभर में कार्यरत इनके एजेंट्स, ग्रामीण ग्राहकों की बैंकिंग एवं वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। फिलहाल, इनके प्लेटफॉर्म से त्वरित मनी ट्रांसफर (डोमेस्टिक), आधार आधारित पेमेंट (एईपीएस), डेबिट कार्ड से कैश की निकासी, प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल, बिल का भुगतान एवं ट्रैवेल बुकिंग आदि की जा सकती है।

स्थानीय समुदायों को जोड़ता है सिंपली लोकल

मैंने 2016 में ब्रॉडकास्टिंग प्लेटफॉर्म ‘सिंपली लोकल’ लॉन्च किया था। इस पर यूजर की लोकैलिटी से जुड़ी हर जानकारी को ब्रॉडकास्ट किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान संकट के दौरान जब हर प्रकार की सूचनाओं की भरमार से लोगों को परेशान होते देखा, तो इस एप में कुछ ऐसे फीचर्स जोड़े गए, जिससे किसी इलाके के लोग स्थानीय समस्याओं, सुरक्षा मसलों पर चर्चा करने के साथ ही अपने घरेलू बिजनेस को प्रमोट भी कर सकें। क्योंकि ऐसा देखा गया है कि जब भी कोई आपातकालीन स्थिति आती है, तो कैसे पूरा समुदाय एकजुट हो जाता है। 

इस तरह आप ‘सिंपली लोकल’ एप को सोशल मीडिया का थर्ड जेनरेशन कह सकते हैं, जो छोटे समूहों को एक बड़े उद्देश्य के लिए जोड़ता है। इस प्लेटफॉर्म पर लोग पड़ोस में होने वाली हर गतिविधि की जानकारी रख सकते हैं। इलाके की खबरें पोस्ट करने के अलावा सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर नजर रख सकते हैं। स्थानीय वेंडर्स, डॉक्टर्स से जुड़ सकते हैं। इससे विभिन्न सोसायटीज की आरडब्ल्यूए/एओए और अलग-अलग समुदाय भी कनेक्ट हो सकते हैं।

निखिल बापना, सीईओ, सिंपली लोकल 

 

दरवाजे तक पहुंचा कैश

देश की एक बड़ी आबादी आज भी डिजिटल इकोनॉमी एवं बैंकिंग सिस्टम का हिस्सा नहीं बन सकी है। ग्रामीण एवं अर्ध शहरी इलाकों में एटीएम एवं बैंक की शाखाओं की कमी होने के कारण लोगों को कैश के लिए दिक्कत होती है। बैंकइट डोरस्टेप कैश डिलीवरी तो नहीं करता, लेकिन लॉकडाउन में हमारे एजेंट्स एवं रिटेलर्स ने शहरी व ग्रामीण ग्राहकों की मांग पर, शारीरिक दूरी का पूरा ध्यान रखते हुए उनके घर तक कैश पहुंचाए। इसके लिए कोई शुल्क भी नहीं लिया गया। इसके अलावा, आने वाले दिनों में कोशिश है कि देश भर में 15 हजार से अधिक बैंकइट आउटलेट्स एवं ब्रांडेंड स्टोर्स खोले जाएं, ताकि एक प्लेटफॉर्म पर लोगों को सुरक्षित डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिल सके। 

अमित निगम, कार्यकारी निदेशक एवं सीओओ, बैंकइट 

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