नई दिल्ली, एजेंसियां: ईडी ने शुक्रवार को बताया कि उसने एक मुखौटा (शेल) कंपनी की 370 करोड़ रुपये की जमा राशि अटैच की है, जिसमें बैंक में निवेश, भुगतान गेटवे और क्रिप्टो खाते शामिल हैं। इस मुखौटा कंपनी की स्थापना दो चीनी नागरिकों द्वारा बेंगलुरु में की गई थी। दोनों चीनी नागरिक 2020 में देश छोड़कर जा चुके हैं।

एजेंसी ने बेंगलुरु स्थित 'येलो ट्यून टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड' के परिसरों पर आठ अगस्त से तीन दिन तक छापा मारने के बाद रुपये के लेनदेन पर रोक लगा दी थी। कर्ज देने वाले कुछ स्मार्टफोन आधारित संदिग्ध एप के खिलाफ मनी लांड्रिंग मामले की जांच के दौरान इस कंपनी की अवैध गतिविधियों का पता चला। इन एप को चीनी पैसे से चलाया जा रहा था।

ईडी ने बताया कि इन एप को जल्द ही बंद कर दिया गया और उनके मुनाफे को डायवर्ट कर दिया गया। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि 23 संस्थाओं ने 'येलो ट्यून टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड' के खाते में 370 करोड़ रुपये जमा किए। इनमें आरोपित एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) और उनकी फिनटेक कंपनियां भी शामिल थीं। क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से रुपये जमा किए गए। ईडी ने कहा कि बार-बार कोशिश के बावजूद, फ्लिपवोल्ट क्रिप्टो एक्सचेंज येलो ट्यून टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए क्रिप्टो लेनदेन का पूरा निशान देने में विफल रहा है। साथ ही आरोप लगाया है कि क्रिप्टो एक्सचेंज केवाईसी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं करा सका है।

ईडी ने कहा क्रिप्टो संपत्तियों का पता लगाने के लिए इसने कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। अस्पष्टता को प्रोत्साहित करके और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग मानदंडों को कम करके, इसने क्रिप्टो मार्ग का उपयोग कर 370 करोड़ रुपये के अपराध की आय को वैध बनाने में सक्रिय रूप से येलो ट्यून की सहायता की गई है। 

Edited By: Amit Singh