जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। यूजीसी को खत्म कर भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) के गठन के लिए प्रस्तावित बिल की प्रक्रियात्मक गलती सुधार ली गई है। सुझावों के लिए तय की गई समयसीमा 7 जुलाई से बढ़ाकर 25 जुलाई कर दिया गया है। कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा ने इसे लेकर सवाल खड़ा किया था।

यूजीसी में बदलावों की यह घोषणा सरकार ने 27 जून को की थी। उसी दिन इससे जुड़े बिल को बेवसाइट पर डालकर सात जुलाई तक सुझाव देने को कहा था। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने मुताबिक सुझावों को लेकर यह जल्दबाजी इसलिए दिखाई गई, क्योंकि 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरु होने वाला है। जिसमें सरकार इस बिल को पेश करना चाहती है। ऐसे में वह इससे पहले बिल से जुड़ी प्रक्रिया को पूरा करना चाहती थी।

सरकार का दावा है कि इस बिल को मंजूरी मिलने के बाद उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा, साथ ही फर्जीवाड़े का खेल भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। ऐसा करने वाले संस्थानों के खिलाफ अब एचईसीआई सीधे कानूनी कार्रवाई कर सकेगी। इसके तहत इसे जुर्माना लगाने और सजा सुनाने का भी अधिकार दिया गया है। मौजूदा समय में यह अधिकार यूजीसी के पास नहीं है।

By Bhupendra Singh