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'भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए तैयार', रिलायंस के मैसेज पर मस्क की स्टारलिंक का जवाब

Published: Sat, 17 Oct 2026 10:49 AM (IST)

एलन मस्क की स्टारलिंक ने भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने की तैयारी जताई है, रिलायंस के उस बयान के ...और पढ़ें

एलन मस्क और अनिल अंबानी। (फाइल फोटो।)

एलन मस्क और अनिल अंबानी। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. स्टारलिंक भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने को तैयार।

  2. रिलायंस ने स्टारलिंक की एंट्री रोकने के आरोप नकारे।

  3. स्टारलिंक ने भारत में समर्पित ढांचा तैयार करने का दावा किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एलन मस्क के नेतृत्व वाली कंपनी स्टारलिंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने पांच वर्ष से अधिक समय तक सरकारी मंजूरियों से देश में एक समर्पित ढांचा तैयार किया है।

कंपनी ने यह भी कहा कि वह भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के लिए तैयार है। स्टारलिंक की एक्स पर पोस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शुक्रवार को जारी बयान को भी टैग किया गया। यह प्रतिक्रिया तब आई है जब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क के उन आरोपों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि कुछ बिजनेस ग्रुप भारत में स्टारलिंक की एंट्री को रोक रहे हैं।

रिलायंस ने क्या कहा था?

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि वह स्टारलिंक समेत सैटेलाइट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, लेकिन सभी कंपनियों को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा।

स्टारलिंक ने क्या कहा?

जवाब में स्टारलिंक ने कहा, हमने पांच वर्षों से अधिक समय तक भारत में नियामकों, उद्योग और परिचालकों के साथ मिलकर काम किया है। भारतीय ट्रैफिक को सुरक्षित तरीके से और केवल भारत में सेवा देने के लिए हमने देश के भीतर समर्पित प्रणालियों, गेटवे और अन्य ढांचे का नेटवर्क तैयार किया है। यह सब जरूरी सरकारी मंजूरियों के साथ किया गया है।

मस्क ने भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोकने के लिए कुछ बड़े उद्योगपतियों पर आरोप लगाया था और बाद में कई पोस्ट में रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम भी लिया।

सरकार ने मस्क के दावे को किया खारिज

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार द्वारा रेवेन्यू-शेयरिंग (राजस्व-साझाकरण) फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने और कंपनियों द्वारा सुरक्षा संबंधी शर्तों को पूरा करने के बाद ही सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटित किया जाएगा। स्टारलिंक, रिलायंस जियो और यूटेलसैट वनवेब को भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं देने के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं।

उम्मीद है कि इन सेवाओं के जरिए उन दूर-दराज के इलाकों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंच सकेगी, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाना मुश्किल है। अमेजन का प्रोजेक्ट कुइपर भी लाइसेंस पाने की कोशिश कर रहा है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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