विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

SIR विवाद के बीच SSR की एंट्री, मतदाताओं के लिए क्यों है जरूरी?

Published: Thu, 15 Oct 2026 10:42 PM (GMT+05:30)

SIR विवाद के बीच अब चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार सहित 17 राज्यों में SSR की घोषणा की है। ...और पढ़ें

चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में SSR की घोषणा की।

चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में SSR की घोषणा की।

HighLights

  1. चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में SSR की घोषणा की।

  2. 2027 में 18 वर्ष पूरे करने वाले नए मतदाता जुड़ेंगे।

  3. अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, बिहार सहित 17 राज्यों में मतदाता सूची से बाहर और नए मतदाताओं के नामों को मतदाता सूची में जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने एसएसआर ( स्पेशल समरी रिवीजन ) का ऐलान किया है।

जो मतदाता सूची को अपडेट रखने की चुनाव आयोग की सालाना गतिविधि का हिस्सा है। इस दौरान आयोग ने राज्यों से 2027 में मतदाता बनने की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं को उनकी कटआफ तारीख के तहत फार्म-6 भरवाने के विशेष निर्देश दिए है। मौजूदा समय में नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए साल में चार कटआफ तारीख तय की है। जो एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई व एक अक्टूबर है।

आयोग ने एसआइआर का ऐलान जिन 17 राज्यों में किया है, उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित वे सभी पांचों राज्य भी शामिल है, जहां 2027 की शुरूआत में ही होने विधानसभा चुनाव होने है।

आयोग की मानें तो इस अभियान के चलते एक जनवरी 2027 तक 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची में जुड़ जाएंगे।

वहीं आयोग ने मतदाता पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) से कहा है कि वह एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को 18 साल की उम्र पूरी कर रहे युवाओं के भी फार्म-6 भरवाए।

ताकि जैसे ही 18 साल की उम्र पूरा हो उनके नाम मतदाता सूची में तुरंत जोड़े जा सकें। आयोग ने राज्यों से इस काम को दो नवंबर 2025 से शुरू करने व चार जनवरी 2027 को अंतिम सूची के प्रकाशन के निर्देश दिए है।माना जा रहा है कि इसके बाद ही उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों का ऐलान हो सकता है। 

आयोग के इसके साथ ही एसएसआर में शमिल सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (सीईओ) से कहा है कि वह राजनीतिक दलों के एसएसआर के दौरान जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची और अंतिम मतदाता सूची की हार्ड और साफ्ट कापी रीडेबल फार्म में मुहैया कराए।

वहीं चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के साथ भी इसे साझा किया जाए, ताकि किसी को सूची को लेकर कोई आपत्ति है तो वह मतदान के दस दिन पहले तक उसे दर्ज कराकर ठीक करा सके। आयोग ने यह कदम तब उठाया है, चुनाव में हारने के बाद प्रत्याशियों की ओर से मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया जाता है।

यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में SSR में आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य, पांच नामों की आपत्ति पर होगी जांच; जानिए बाकी डिटेल