पश्चिम बंगाल में SSR में आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य, पांच नामों की आपत्ति पर होगी जांच; जानिए बाकी डिटेल
चुनाव आयोग ने बंगाल समेत 17 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की प्रक्रिया शुरू की है, ...और पढ़ें

HighLights
मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण शुरू।
आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा इस प्रक्रिया में।
5 या अधिक नामों पर आपत्ति की होगी जांच।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल समेत देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। आयोग के अनुसार, किसी मतदान केंद्र की कुल मतदाता संख्या के दो प्रतिशत या उससे अधिक नाम हटाने का प्रस्ताव आने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय उसकी जांच करेगा।
संबंधित निर्वाचन अधिकारी को भी प्रस्ताव का सत्यापन करना होगा। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति पांच या उससे अधिक नामों पर आपत्ति दर्ज कराता है, तो उसकी भी अलग से जांच की जाएगी।
चार जनवरी को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 11 दिसंबर तक सूची में संशोधन, नाम जोड़ने और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चलेगी। चार जनवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
आधार कार्ड नहीं होगा अनिवार्य
एसएसआर के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मतदाता सूची में त्रुटियों को सुधारने तथा मृत या दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नाम हटाने की सुविधा मिलेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा। मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्धारित पोर्टल पर आवेदन या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। साथ ही, एक परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची में एक साथ रखने का निर्देश दिया गया है।
एसआइआर के बाद पुनरीक्षण पर रहेगी नजर
बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर काफी विवाद हुआ था। इस प्रक्रिया में सूची से बाहर किए गए कई मतदाताओं की अपील सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित ट्रिब्यूनलों के समक्ष लंबित है। सूची से नाम हटने के कारण संबंधित मतदाता विधानसभा चुनाव के साथ नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव में भी मतदान नहीं कर सके थे।
राज्य में विभिन्न नगर निकायों के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में ट्रिब्यूनलों से समय पर राहत नहीं मिलने पर मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, एसआइआर में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में आयोग ने एसएसआर की अधिसूचना जारी की है। हालांकि, एसएसआर नियमित प्रक्रिया है, जो हर वर्ष मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए आयोजित की जाती है।
