अल नीनो का कहर: सूखे की चपेट में देश के 218 जिले, कृषि पर मंडरा रहा संकट
देशभर के 218 जिलों में मध्यम से गंभीर सूखे के हालात बन रहे हैं, जो 2023 की तुलना में अधिक हैं और अल-नीनो के प्रभाव के कारण है।

देशभर में अल-नीनो का असर (AI जेनरेटेड फोटो)
HighLights
देश के 218 जिलों में मध्यम से गंभीर सूखे के हालात।
अल-नीनो के कारण सूखे का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर असर की आशंका है।
डिजिटल डेस्क, पुणे। देशभर के करीब 218 जिलों में सूखे के हालात बनते जा रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का स्टैंडर्डाइज्ड प्रेसिपिटेशन इंडेक्स (SPI) इन्हें मध्यम, गंभीर या बहुत ज्याद सूखे वाली श्रेणियों में रखता है।
2023 में भी ऐसे हालात बने थे, लेकिन तब भी 17 अगस्त से 13 सितंबर, 2023 के बीच इन श्रेणियों में 188 जिले दर्ज किए गए थे। वहीं इस साल 13 अगस्त से 9 सितंबर, 2026 के बीच चार हफ्तों में 218 जिले मध्यम, गंभीर या बहुत ज्यादा सूखे वाली श्रेणी में आ गए हैं।
हालांकि, 2023 में सूखे वाली श्रेणी में जिलों की कुल संख्या 469 थी। वहीं इस बार ये संख्या घटकर इस साल 454 हो गई है। इससे पता चलता है कि सामान्य से कम बारिश वाले ज्यादा जिले अब ज्यादा गंभीर बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं और इसलिए दूसरी श्रेणियों में चले गए हैं।
अल-नीनो से बढ़ रहा सूखे का खतरा
IMD के नक्शे के अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों के साथ-साथ गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और मेघालय के कई जिलों और पंजाब-हरियाणा के कुछ हिस्सों में सूखे जिलों की मौजूदगी साफ देखी जा सकती है।
दूसरी ओर, मध्यम, गंभीर और बहुत ज्यादा बारिश वाली श्रेणियों में जिलों की संख्या 2023 में 58 से बढ़कर इस साल 86 हो गई है, जो बारिश के दोनों चरम स्तरों में तेजी से बदलाव की ओर इशारा करता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, IMD पुणे में क्लाइमेट एप्लीकेशन और यूजर इंटरफेस के प्रमुख डॉ. सत्यबान बिशोयी रत्ना ने कहा, 'मध्यम सूखे, गंभीर सूखे और बहुत ज्यादा सूखे वाली श्रेणियों में आने वाले जिलों को हाल की बारिश के लिहाज से सूखे जैसे हालात का सामना करने वाला माना जा सकता है और ऐसे हालात खेती और जल संसाधनों पर असर डाल सकते हैं।'
रत्ना ने कहा, 'हाल के चार हफ़्तों में देश के कई हिस्सों में सूखापन देखा जा रहा है। अगर ऐसी स्थिति बनी रहती है, तो इससे खेती और जल संसाधनों के लिए और चिंताएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि कम बारिश से फसल की बढ़त और पैदावार पर असर पड़ सकता है।
रत्ना ने आगे कहा, 'इसका असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा सीधे तौर पर पड़ता है, जहां बारिश का खेती और रोजमर्रा की जिंदगी के दूसरे पहलुओं से गहरा संबंध होता है, जबकि शहरी इलाकों में टैंकरों से पानी मिल सकता है।'
