नई दिल्ली (प्रेट्र)। हाल के दिनों में आत्यहत्या के कई मामले सामने आए, जिन्होंने सभी को झकझोर कर रख दिया। चाहे वह आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज का सुसाइड हो या बुराड़ी में सामूहिक आत्महत्या। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल करीब 8 लाख लोग आत्महत्या कर अपनी जिंदगी को खत्म कर देते हैं। सबसे हैरानी वाली बात ये है कि इसके ज्यादातर शिकार 15 से 29 साल की आयु वर्ग वाले होते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या सभी देशों और क्षेत्रों में होती है, भले ही अमीर हों या गरीब। हालांकि कम और मध्यम आय वाले देशों में आत्यहत्या के अधिक मामले पाए जाते हैं। हाल ही में आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक युवा वर्ग इसकी चपेट में सबसे ज्यादा है।

महिलाओं से ज्यादा पुरुष कर रहे आत्महत्या
रिपार्ट में कहा गया है कि 20 प्रतिशत मामलों में आत्महत्या के लिए जहर खाने का तरीका अपनाया जाता है। ये विधि अधिकांश ग्रामीण और कृषि आय वाले देशों में पाई जाती है। आत्महत्या के अन्य सामान्य तरीके फांसी और खुद को बंदूक से गोली से मार लेना है। विकसित देशों में शराब का अधिक सेवन किया जाता है, जिससे लोगों की मृत्यु होती है। शराब के अधिक सेवन को भी आत्महत्या का ही एक रूप माना गया है। रिपोर्ट मे बताया गया है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं।

आत्महत्या के लक्षण
किसी को भी आत्महत्या से बचाने में उनके परिवार के लोग, दोस्त और सहकर्मी मदद कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले किसी भी ऐसे मानसिक रोगी व्यक्ति के लक्षणों को नोटिस करना चाहिए। व्यक्ति में अवसाद के ये पांच लक्षण अगर लगातार बने रहें तो वह आत्महत्या के लिए प्रेरित होता है। इसमें मन का उदास होना, काम में मन नहीं लगना, भूख नहीं लगना, नींद नहीं आना, एकाग्रता में कमी और मरने की भावना शामिल हैं। ऐसे लोगों पर परिवार के लोगों को नजर रखना चाहिए। ताकि समय रहते पीड़ित व्यक्ति को आत्महत्या करने से रोका जा सके।

क्या करना चाहिए
इस स्थिति से ग्रस्त मनुष्य को परिवारजन, कार्यक्षेत्र के सहयोगी और मित्रों से संवाद रखना चाहिए, ताकि वह इस स्थिति से उबर सकें। मानसिक अवसाद के लक्षण होने की स्थिति में जल्द मनोविज्ञान चिकित्सक से परामर्श कर उपचार आरंभ कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्यों को किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

Posted By: Arti Yadav