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Budget 2023: शहरों में जीवन सुगम बनाने की कोशिश, छोटे शहरों के लिए 10 हजार करोड़ का फंड

Budget 2023 केंद्र की योजना राज्यों को शहरों के विकास से जुड़ी योजनाओं के सही तरह क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने की है। उन्हें यूआइडीएफ की सुविधा हासिल करने के लिए शहरी सेवाओं के लिए उचित यूजर चार्ज लागू करने की दिशा में बढ़ना होगा।

By Jagran NewsEdited By: Shashank MishraPublished: Wed, 01 Feb 2023 08:14 PM (IST)Updated: Wed, 01 Feb 2023 08:14 PM (IST)
सीवर की सफाई में पूरी तरह मशीनों की ली जाएगी मदद।

मनीष तिवारी, नई दिल्ली। ईज आप लिविंग यानी जीवन को सुगम बनाना मोदी सरकार सरकार के प्राथमिक लक्ष्यों में शामिल रहा है। शहरों के विकास के बिना विकसित-समृद्ध-सशक्त भारत संभव भी नहीं है। इसी लिहाज से शहरों में सुविधाओं के विकास के लिए केंद्र सरकार ने दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ अर्बन इन्फ्रा डेवलपमेंट फंड (यूआइडीएफ) की स्थापना की घोषणा की है। यह फंड दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के विकास में खर्च किया जाएगा। यह फंड इसी तरह से ग्रामीण विकास के लिए बनाए गए कोष की तर्ज पर स्थापित किया जाएगा।

केंद्रीय बजट में यूआइडीएफ की स्थापना की घोषणा

पचास हजार से एक लाख की आबादी वाले शहर दूसरी श्रेणी (टियर टू) में आते हैं, जबकि बीस हजार से पचास हजार की आबादी वाले शहर तीसरी श्रेणी (टियर थ्री) में आते हैं। केंद्रीय बजट में यूआइडीएफ की स्थापना की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इसका प्रबंधन राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा किया जाएगा और यह राज्यों को शहरों के विकास के लिए होड़ करने के लिए प्रेरित करेगा।

केंद्र की योजना राज्यों को शहरों के विकास से जुड़ी योजनाओं के सही तरह क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने की है। उन्हें यूआइडीएफ की सुविधा हासिल करने के लिए शहरी सेवाओं के लिए उचित यूजर चार्ज लागू करने की दिशा में बढ़ना होगा। सरकार की कोशिश यह है कि शहर सुनियोजित विकास की तरफ बढ़ें। शहरों में सुविधाओं के विकास के लिए इस कोष का इस्तेमाल सरकारी एजेंसियां करेंगी।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने अपने इस कथन के माध्यम से सरकार का नजरिया स्पष्ट कर दिया है कि अपने शहरों को भविष्य के टिकाऊ शहरों का रूप देने के लिए शहरी नियोजन सुधार बेहद जरूरी हैं और इन्हें हर तरह से प्रोत्साहित किया जाएगा। सभी शहरों और कस्बों को मैन होल से मशीन होल की प्रणाली में बदला जाएगा ताकि सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के कार्य में किसी व्यक्ति की जान जोखिम में न रहे।

सरकार इन टैंक और सीवर की सौ प्रतिशत मशीनी सफाई की दिशा में बढ़ेगी। गीले और सूखे कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी सरकार ने पूरा जोर लगाया है। सरकार यह भी चाहती है कि शहरी निकाय आत्मनिर्भर बनें यानी वे अपने खर्च खुद जुटाने की दिशा में बढ़ें। इसके लिए प्रापर्टी टैक्स यानी संपत्ति कर संबंधी प्रशासनिक सुधार आगे बढ़ाने होंगे औऱ अर्बन इन्फ्रा के लिए यूजर चार्ज की प्रणाली अपनानी होगी।

Video: Union Budget 2023: Nirmala Sitharaman ने पेश किया बजट, Railway को मिला सबसे बड़ा बजट

बजट के जरिये केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शहरों को लोगों से पैसा जुटाने के लिए म्युनिसिपल बांड की दिशा में बढ़ना होगा। इसके लिए उन्हें अपनी साख बेहतर करनी है और इसी के आधार पर उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। ध्यान रहे कि फिलहाल कुल साढ़े चार हजार शहरी निकायों में पचास भी ऐसे नहीं है जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो। इस कारण शहरों को परवान चढ़ाने की कई योजनाएं असफल हो रही हैं।

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