नई दिल्ली, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के बाद स्कूलों में परोसे जाने वाले मिड-डे मील में अब राज्यों को फोर्टीफाइड (पौष्टिकता से भरपूर) चावल का इस्तेमाल करना होगा। इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील में सामान्य चावल की जगह फोर्टीफाइड चावल ही मुहैया कराने की योजना बनाए। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) से इसे लेकर संपर्क करें।

जारी किए ये निर्देश 

शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि एफसीआइ ने जो जानकारी दी है, उसमें मौजूदा समय में उसके पास स्टाक में 7.59 लाख टन फोर्टीफाइड राइस मौजूद है जो अलग-अलग राज्यों में मौजूद है। ऐसे में जिन राज्यों में इसकी उपलब्धता है वहां प्राथमिकता से इसे लिया जाए।

सभी राज्यों से की थी चर्चा

शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में इस संबंध में सभी राज्यों से चर्चा भी की थी जिसमें फोर्टीफाइड राइस के इस्तेमाल को लेकर राज्यों की आशंकाओं का जवाब भी दिया था। साथ ही यह भी भरोसा दिया था कि इसकी खरीद में कीमत का जो भी अंतर आयेगा उसकी भरपाई मंत्रालय करेगा।

पीएम मोदी ने किया था एलान 

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से कुपोषण से निपटने का एलान करते हुए कहा था कि वर्ष 2024 तक सभी सरकारी योजनाओं के तहत मिलने चावल को फोर्टीफाइड कर दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने राशन की दूकानों और मिड-डे मील जैसी योजनाओं को फोर्टीफाइड राइस की देने को कहा है। उनके कहना था कि इसके इस्तेमाल से हम लोगों को बेहतर पोषण मुहैया करा सकेंगे। अभी फोर्टीफाइड राइस का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा जिलों में मिड-डे मील योजना में किया जा रहा है।