चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा स्थगित, आयोग ने व्यस्त शेड्यूल का दिया हवाला
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के दो सम्मेलनों के स्थगन पर सफाई दी है, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करने वाले थे।

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार(फाइल फोटो)
HighLights
चुनाव आयोग ने यूपी सम्मेलनों के स्थगन पर स्पष्टीकरण दिया।
ज्ञानेश कुमार के कार्यक्रमों में बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया।
आयोग ने आंतरिक असंतोष की खबरों को पूरी तरह खारिज किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के दो सम्मेलनों के स्थगित होने पर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सफाई दी है। आयोग ने कहा कि आधिकारिक कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
इन दोनों सम्मेलनों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करने वाले थे, जो इन दिनों आयोग के भीतर कथित आंतरिक असंतोष की खबरों के चलते चर्चा में हैं। ज्ञानेश कुमार को गुरुवार को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी का दौरा करना था।
क्यो शुरू हुआ विवाद?
यह घटनाक्रम द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के दो दिन बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 10 महीनों में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों का कहना था कि इनमें से कई फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
फैसले सर्वसम्मति से हुए: चुनाव आयोग
मामले पर सफाई देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संस्थाओं में आंतरिक तकनीकी टिप्पणियां और लिखित सवाल-जवाब एक मानक प्रक्रिया हैं। आयोग ने भरोसा दिलाया कि एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है।
आयोग ने ईएलसी सम्मेलनों के स्थगित होने के पीछे कार्यक्रम स्थल की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के व्यस्त कार्यक्रम और प्राकृतिक परिस्थितियों जैसे विभिन्न लॉजिस्टिक व प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव पहले भी हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड जैसे राज्यों में हो चुका है। साथ ही, इन दोनों सम्मेलनों को टालने का फैसला 21 सितंबर को ही ले लिया गया था, यानी उस रिपोर्ट के आने से दो दिन पहले जिसने आयोग में मतभेद की बात उजागर की थी।
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ELC 2.0 अभियान
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग वर्ष 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता जागरूकता अभियान के तहत चरणबद्ध तरीके से ELC 2.0 कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।
दूसरी तरफ, विपक्ष भी इस मुद्दे पर हमलावर नजर आया। गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि वोटों की चोरी की जा रही है, जिससे सांसदों द्वारा बनाए गए कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं।
गांधी ने ज्ञानेश कुमार को देशद्रोही करार देते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और चेतावनी दी कि देश में लोकतंत्र को नष्ट होते देख कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
क्या है इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब?
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब का उद्देश्य छात्रों और युवा मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनाव से जुड़े संस्थानों के कामकाज से परिचित कराना है।
इस पहल के तहत शुरू किए गए ELC 2.0 अभियान की टैगलाइन लोकतंत्र सीखें, लोकतंत्र का नेतृत्व करें रखी गई है। आयोग के अनुसार, इस कार्यक्रम का मकसद युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझाने के साथ-साथ उनमें सार्थक भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
