नई दिल्ली। राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव घोषणा पत्र में मुफ्त उपहारों का वादा करने की बढ़ती प्रवृत्तिपर रोक लगाने और इस बारे में दिशा-निर्देश तय करने के लिए चुनाव आयोग ने सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने यह कदम उठाया है।

सोमवार को होने वाली बैठक में आयोग चुनाव घोषणापत्र में मुफ्त उपहारों पर सभी दलों से राय लेगा और इसके बाद ही दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। तमिलनाडु सरकार द्वारा मुफ्त उपहार बांटने की घोषणा के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने 5 जुलाई को आयोग को इस बाबत दिशा-निर्देश तय करने कहा था। आदेश में कोर्ट ने कहा था कि ऐसा कोई कानून नहीं जिससे चुनाव घोषणापत्र की बातों को सीधे तौर पर तय किया जा सके। आयोग का कहना है कि नियम बनाने से पहले विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की राय ली जाएगी। पार्टियां अपने चुनाव घोषणापत्र में लैपटॉप, टीवी, मिक्सर के अलावा दूसरी घरेलू वस्तुएं देने का वादा करती रही हैं। इन दलों का तर्क है कि मुफ्त उपहार का मकसद गरीबों का कल्याण है।

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