जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक फरवरी को ई-वे बिल लागू होने के कुछ ही घंटे के बाद सिस्टम फेल होने की घटना से सबक लेते हुए सरकार अब पुन: इसके क्रियान्वयन के लिए फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। इसी दिशा में केंद्र ने आला टैक्स अधिकारियों को कहा है कि वे राज्यों के साथ मिलकर यह तय करें कि उनके यहां अंतर्राज्यीय व्यापार पर ई-वे बिल कब से लागू किया जाए। यह निर्देश इसलिए अहम है, क्योंकि जीएसटी काउंसिल 10 मार्च को दिल्ली में हुई बैठक में पहले ही यह तय कर चुकी है कि राज्य के भीतर व्यापार के लिए ई-वे बिल चरणबद्ध ढंग से एक जून 2018 से पहले लागू कर दिया जाए।

सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क (सीबीईसी) की अध्यक्ष वनजा एन सरना ने शीर्ष परोक्ष कर अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि सभी मुख्य आयुक्त अपने-अपने राज्य में वाणिज्य कर वाणिज्य कर आयुक्तों से चर्चा कर यह तय करें कि उनके यहां ई-वे बिल किस तारीख से लागू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय भी सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर ई-वे बिल के क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

दरअसल पिछली बार सरकार ने जब एक फरवरी 2018 से देशभर में ई-वे बिल लागू करने की कोशिश की थी, तब कई राज्यों ने भी अपने यहां इंट्रा स्टेट ई-वे बिल लागू कर दिया था जिसके कारण बोझ बढ़ने से पूरा सिस्टम चरमरा गया। यही वजह है कि जीएसटी काउंसिल ने इस बार सावधानी बरतते हुए ई-वे बिल को चरणबद्ध ढंग से लागू करने का निर्णय किया है। पहला चरण 15 अप्रैल के बाद शुरु होगा, लेकिन सभी राज्यों में यह एक जून 2018 से पहले लागू कर लिया जाएगा।

काउंसिल के सूत्रों की मानें तो पहले चरण में आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में लागू होगा, जबकि दूसरे चरण में बिहार, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और तमिलनाडु में इसे लागू किया जाएगा। इसी तरह तीसरे चरण में अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मेघालय, पुद्दुचेरी और सिक्किम में ई-वे बिल लागू किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में अन्य राज्यों में ई-वे बिल लागू होगा। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस राज्य में कब से ई-वे बिल लागू होगा।

 

Posted By: Tilak Raj

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