नई दिल्‍ली (जेएनएन)। यह सही है कि वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन शिक्षा ही पठन-पाठन का एक मात्र विकल्प है, लेकिन विसंगतियों की विविधता से भरे देश में यह किसी चुनौती से कम नहीं है। आइए जानते हैं कि ई-लर्निंग के रास्ते की वर्तमान में कौन सी बाधाएं कितनी बड़ी चुनौती हैं।

बिजली की समस्या

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अध्ययन के अनुसार देश के 16 फीसद परिवारों को रोजाना एक से लेकर आठ घंटे की बिजली उपलब्ध होती है। 33 फीसद को रोजाना 9-12 घंटे बिजली मिलती है जबकि 47 फीसद परिवारों का नसीब अच्छा है उन्हें एक दिन में 12 घंटे से ज्यादा बिजली मिलती है।

उपकरणों की उपलब्धता

ऑनलाइन क्लास के लिए कंप्यूटर को सबसे अच्छा माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार 24 फीसद भारतीयों के पास स्मार्टफोन हैं जबकि सिर्फ 11 फीसद परिवारों के पास किसी प्रकार का कंप्यूटर हैं जिनमें डेस्कटॉप, लैपटॉप, नोटबुक्स, नेटबुक्स और पामटॉप्स या टैबलेट्स शामिल हैं।

लैंगिक अंतर

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन आफ इंडिया के अनुसार 2019 में 67 फीसद पुरुष इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जबकि महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 33 फीसद पर ही सिमट जाता है। ग्रामीण भारत में 72 फीसद पुरुषों की तुलना में सिर्फ 28 फीसद महिलाएं इंटरनेट इस्तेमाल करती हैं।

इंटरनेट कनेक्शन

शिक्षा पर 2017-18 में नेशनल सैंपल सर्वे की एक रिपोर्ट के मुताबिक 24 फीसद भारतीय परिवारों के पास इंटरनेट की सुविधा है। देश की 66 फीसद आबादी गांवों में रहती है। ग्रामीण इलाकों में 15 फीसद परिवार ही इंटरनेट सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं जबकि शहरी क्षेत्र में यह 42 फीसद है।

राज्यों के बीच असमानता

दिल्ली, केरल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड के 40 फीसद से अधिक परिवारों के पास इंटरनेट का एक्सेस है। जबकि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लिए यह अनुपात 20 फीसद से भी कम है।

इंटरनेट की गुणवत्ता

क्यूएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में घर पर ब्राडबैंड इस्तेमाल करने वाले तीन फीसद लोगों ने केबल कट का सामना किया। 53 फीसद को खराब कनेक्टिविटी से दो-चार होना पड़ा। 32 फीसद को सिग्नल की समस्या झेलनी पड़ी। मोबाइल डाटा के मामले में 40.2 फीसद लोगों ने खराब कनेक्टिविटी का दौर झेला जबकि 56.6

फीसद को सिग्नल की दिक्कत सामने आई।

देश में ऑनलाइन एजुकेशन को लेकर भले ही अभी चुनौतियों की लंबी फेहरिस्त हो, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जिनसे इसका भविष्य सुनहरा दिखता है।

तेज इंटरनेट संघनता

आइएएमएआइ और कांतार आइएमआरबी की 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 48.1 करोड़ इंटरनेट यूजर्स थे और इनके बढ़ने की दर 11.34 फीसद थी। अमेरिका स्थित मार्केट रिसर्च फर्म ई-मार्केटर के अनुसार दिसंबर 2017 तक भारत में 29.16 करोड़ लोग स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते थे। 15.6 फीसद की वृद्धि के साथ 2018 के अंत तक इसे बढ़कर 33.7 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया था। इंटरनेट और स्मार्ट फोन की बढ़ती तेज सघनता देश में ई लर्निंग की उम्मीद को बढ़ाती है।

कामकाजी के लिए उपयोगी

वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए पढ़ाई की यह विधा बहुत उपयोगी है जो अपनी नौकरी के चलते उच्च शिक्षा नहीं हासिल कर पाते। ऑनलाइन एजुकेशन उनके लिए किसी वरदान सरीखी है। विविध कोर्सों के तहत वे अपना करियर संवार सकते हैं।

धन और समय की बचत

इंटरनेट के माध्यम से पहले से ही अपलोड लेक्चर, वीडियो को अपनी सुविधानुसार कोई भी कहीं पढ़ व सुन सकता है। ऑनलाइन एजुकेशन की लागत बहुत कम है। छात्रावास और आवागमन का खर्च ऊपरी बचत है। ऑनलाइन मौजूद कंटेंट के चलते किताबों को खरीदने की जरूरत भी नहीं होगी।

उद्योगों को अपेक्षानुरूप हुनर

वर्ल्‍ड एंप्लायमेंट एंड सोशल आउटलुक की एक रिपोर्ट के अनुसार 2017 में 1.83 करोड़ भारतीय बेरोजगार थे। 2019 में इनकी संख्या बढ़कर 1.89 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया था। दूसरी तरफ नासकॉम की रिपोर्ट कहती है कि 2022 तक भारत में साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र के लिए 60 लाख लोगों की दरकार होगी। बड़ी आइटी कंपनियों का कहना है कि देश के ज्यादातर आइटी ग्रेजुएट हायर करने के काबिल नहीं है। इसकी वजह रोजगार और योग्यता में विसंगति है। जहां रोजगार की जरूरत है, उसके अनुसार लोगों के पास हुनर या डिग्री नहीं है। ऑनलाइन एजुकेशन इस विसंगति को दूर करने की सामथ्र्य रखता है।

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