E 20 फ्यूल का कॉन्सेप्ट कहां से आया? किन-किन देशों में हो रहा इस्तेमाल, पूरी डिटेल
भारत में ई-20 ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा है, जबकि ब्राजील और थाईलैंड को छोड़कर अधिकांश देशों में ई-5 या ई-10 ही सामान्य है।

भारत में ई-20 ईंधन का उपयोग अब सामान्य हो गया है

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत में ई-20 (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) ईंधन को लेकर जारी विवाद के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि कई देशों में ई-20 ईंधन की बिक्री हो रही है।
दैनिक जागरण ने अपने स्तर पर जब पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि ब्राजील व थाईलैंड दो ही देशों में ई-20 पेट्रोल सामान्य तौर पर उपलब्ध है और व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है। अधिकांश देशों में ई-5 या ई-10 ही सामान्य ईंधन है।
ब्राजील में लंबे समय से ई-20 की हो रही बिक्री
ब्राजील में ई-20 की बिक्री लंबे समय से हो रही है और पिछले डेढ़ दशक से थाईलैंड ई-10 के साथ ई-20 को भी बढ़ावा दे रहा है। कुछ देश प्रायोगिक तौर पर इसे बढ़ावा दे रहे हैं। इन देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बिल्कुल अलग है। यहां पूरे देश में ई-20 एक सामान्य ईंधन के तौर पर पेट्रोल वाले वाहनों में इस्तेमाल होने लगा है।
दुनिया के अन्य देशों में ई-20 पर स्थिति अलग-अलग है। अमेरिका में ई-10 (10 प्रतिशत एथनॉल) व्यापक रूप से उपलब्ध है। ई-15 सीमित स्टेशनों पर मिलता है, लेकिन ई-20 की सामान्य वाहनों के लिए मंजूरी या उपलब्धता नहीं है।
मिनेसोटा को E-20 की नहीं मिली मंजूरी
मिनेसोटा ने ई-20 अनिवार्य करने की कोशिश की थी, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से लागू नहीं हो सका। हाई-ब्लेंड जैसे ई-25 या ई-30 मुख्य रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध होते हैं। जर्मनी और फ्रांस समेत अधिकतर यूरोपीय देशों में कुछ समय पहले तक सिर्फ ई-5 पेट्रोल की ही इजाजत थी।
अब वहां ई-10 की बिक्री लागू कर दी गई है, लेकिन यह अभी भी कई सरकारों की तरफ से प्रोत्साहन के बावजूद व्यापक बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। वहां ई-85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए सीमित स्टेशनों पर उपलब्ध है, लेकिन ई-20 को किसी भी यूरोपीय देश ने बढ़ावा नहीं दिया है।
ई-20 इस्तेमाल करना वाला पहला देश ब्राजील
सिर्फ ब्राजील ही ऐसा देश है जो सबसे पहले से (पिछली सदी के आठवें दशक के अंत से) ई-20 (मोटे तौर पर ई-18 से ई-27.5 के बीच) अनिवार्य ब्लेंडिंग का कार्यक्रम चला रहा है। लेकिन ब्राजील के पेट्रोल पंपों पर फ्लेक्सी-फ्यूल से चलने वाले वाहनों के लिए ई-20 से ई-100 तक के ईंधन उपलब्ध होते हैं।
चूंकि ब्राजील एथनॉल अपनाने वाला सबसे पुराना देश है, इसलिए वहां वाहन निर्माताओं ने पिछले कुछ दशकों में इंजन को भी उसी के हिसाब से तैयार कर लिया है। इसलिए वहां समस्याएं न्यूनतम हैं।
थाईलैंड में 2008 से ई-20 की बिक्री शुरू हुई और सरकार सक्रिय रूप से इसे बढ़ावा दे रही है। थाईलैंड सरकार ई-10 के साथ ई-20 व ई-85 भी उपलब्ध करा रही है। ई-20 पर वहां सब्सिडी भी दी जाती है और अमूमन अब यह सामान्य ईंधन बन चुका है।
भारत में कब से शुरू हुई प्रक्रिया?
भारत में एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मिश्रण दर लगभग 19-20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वार्षिक लगभग 1000 करोड़ लीटर से ज्यादा एथनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिश्रण के लिए हो रहा है।
एथनॉल उत्पादन क्षमता 2014 के करीब 400 करोड़ लीटर से बढ़कर अब 1800 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है। सरकार का कहना है कि वर्ष 2014 से पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की वजह से अभी तक देश को 1.44 लाख करोड़ रुपये के कच्चे तेल आयात की बचत हुई है।
