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अब हफ्तों तक पानी के भीतर छिपी रहेंगी भारतीय पनडुब्बियां, स्वदेशी AIP सिस्टम के साथ नौसेना की ताकत में इजाफा

Published: Sat, 24 Oct 2026 11:10 PM (GMT+05:30)

भारतीय नौसेना के लिए DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम के 'सेटिंग टू वर्क फेज-2' का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

स्वदेशी AIP सिस्टम का सफल शुभारंभ

स्वदेशी AIP सिस्टम का सफल शुभारंभ

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के सामरिक इतिहास में शनिवार का दिन गर्व और आत्मनिर्भरता के एक नए स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। समंदर की अथाह गहराइयों में देश की हिफाजत करने वाले प्रहरियों की ताकत और सहनक्षमता को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बेहद अहम सफलता हासिल हुई है।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की नेवल मटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (एनएमआरएल) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआइपी) सिस्टम के 'सेटिंग टू वर्क फेज-2' का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है।

गुजरात के हजीरा में हुआ ऐतिहासिक समारोह

यह महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह गुजरात के हजीरा स्थित लार्सन एंड टूब्रो के एएम नाइक हेवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में शनिवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में रक्षा सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राजेश कुमार सिंह ने वर्चुअल माध्यम से शिरकत की।

इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के चीफ आफ मटीरियल वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार और डीआरडीओ के महानिदेशक (नेवल सिस्टम्स एंड मटेरियल्स) आर. बालमुरालीकृष्णन भी हजीरा में विशेष रूप से उपस्थित रहे। रक्षा सचिव ने इस स्वदेशी उपलब्धि पर विज्ञानियों और उद्योग सहयोगियों की अटूट मेहनत की सराहना करते हुए इसे जमीन पर साकार हुआ एक प्रेरणादायक स्वरूप बताया।

कलवरी-क्लास पनडुब्बियों में होगी तैनाती

यह अत्याधुनिक स्वदेशी एआइपी तकनीक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। यह प्रणाली पनडुब्बियों की वायुमंडलीय आक्सीजन पर निर्भरता को कम करती है, जिससे वे पानी के भीतर बिना सतह पर आए लंबे समय तक छिपी रहकर गश्त कर सकती हैं। आने वाले चरण में इस एआइपी एनर्जी माड्यूल को ऊर्जावान बनाकर नौसेना के कड़े प्रोटोकाल के तहत परखा जाएगा।

इसके बाद, इसे वर्ष 2027 की शुरुआत में मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंप दिया जाएगा, जहां इसे कलवरी-क्लास पनडुब्बियों में एकीकृत किया जाएगा। इस दौरान नौसेना के परीक्षणों में मिले निरंतर सहयोग और हाइड्रोजन प्रणालियों की सुरक्षा संस्कृति को सर्वोपरि रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)