नई दिल्ली, जेएनएन। डोसा किंग के नाम से मशहूर सर्वना भवन के मालिक पी राजगोपाल का गुरुवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। मद्रास हाईकोर्ट ने उन्हें प्रिंस शांथाकुमार नाम के व्यक्ति की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पी राजगोपाल के उत्थान और पतन पर एक नजर:

ऐसे शुरू हुआ सफर
पी राजगोपाल के पिता तमिलनाडु के छोटे से गांव तूतीकोरिन में प्याज की किसानी करते थे। सपनों को साकार करने राजगोपाल बहुत छोटी सी उम्र में चेन्नई आ गए। किराने की दुकान खोलने के बाद रेस्त्रां के व्यवसाय में प्रवेश किया। ज्योतिषी की सलाह को बहुत अधिक मानते थे।

व्यावसायिक सलाहकारों द्वारा गुणवत्ता पर समझौता करने या कीमतों में वृद्धि के बारे में बताने के बावजूद, राजगोपाल एक रुपये में पौष्टिक भोजन प्रदान करने की अपनी नीति पर अड़े रहे। देखते ही देखते उनका रेस्त्रां जल्द ही प्रसिद्ध हो गया।

जल्द ही उन्होंने अन्य आउटलेट खोले और उनकी श्रृंखला पूरे देश में फैल गई। 2000 में, उन्होंने दुबई में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय आउटलेट खोला, जिसके बाद अन्य देशों में भी उनके कई रेस्त्रां खुले।

कर्मचारियों के लिए थे बड़े भाई
अपने कर्मचारियों के बीच 72 वर्षीय पी राजगोपल अन्नाछी के नाम से प्रसिद्ध थे, जिसका अर्थ होता है बड़ा भाई। वह अपने कर्मचारियों का अच्छी तरह से ध्यान रखते थे। सर्वना भवन के कर्मचारियों को अच्छी तरह से भुगतान किया जाता है और वे पेंशन, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, आवास किराया, अपनी बेटियों के लिए विवाह निधि जैसे लाभों का आनंद लेते हैं। जैसे-जैसे रेस्तरां श्रृंखला बढ़ती गई, इन कर्मचारियों के लिए भत्तों में भी वृद्धि हुई।

धार्मिक व्यक्ति
राजगोपाल भगवान मुरुगा के परम भक्त थे। पारंपरिक लैंप और भगवान मुरुगा के विशाल चित्र सर्वना भवन रेस्त्रां में सजावट का हिस्सा हैं। उन्होंने मंदिरों में उदारतापूर्वक योगदान दिया, विशेष रूप से मुरुगा मंदिरों के लिए।

ज्योतिषी को ठहराया जिम्मेदार
उनकी आत्मकथा वेट्री मीधु आसै वीथेन के मुताबिक उन्होंने अपने ज्योतिषी की सलाह के आधार पर अपने रेस्त्रां शुरू किए। उनके पतन और वर्तमान दोष के लिए भी एक ज्योतिषी की सलाह को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिन्होंने उन्हें देश में सबसे अमीर व्यक्ति बनने के लिए जीवज्योति से शादी करने के लिए कहा था।

अपहरण और हत्या
जीवज्योति सर्वना भवन की चेन्नई शाखाओं में से एक के सहायक प्रबंधक की बेटी थी। राजगोपाल की सलाह और धमकियों के बावजूद, जीवज्योति ने प्रिंस शांथाकुमार से शादी कर ली। अक्टूबर 2001 को दंपति का अपहरण कर लिया गया और शांथाकुमार की हत्या कर दी गई।

उनका शव 31 अक्टूबर, 2001 को कोडाइकनाल स्थित टाइगर चोल जंगलों के अंदर से वन विभाग के अधिकारियों ने बरामद किया था। 2004 में चेन्नई की एक सत्र अदालत ने राजगोपाल और आठ अन्य को 10 साल की कठोर कारावास की सजा के लिए दोषी ठहराया। राजगोपाल ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। 2009 में हाईकोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुना दी।

तब राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और मार्च, 2019 को कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि राजगोपाल ने अपने खराब स्वास्थ्य को देखते हुए आत्मसमर्पण करने के लिए और समय देने की गुहार लगाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

बता दें कि राजगोपाल की पहले ही दो शादियां हो चुकी हैं, वह अपनी तीसरी पत्नी के तौर पर जीवज्योति को चाहता था।

बड़ा कारोबार
सर्वना भवन के भारत में 39 से अधिक रेस्त्रां और विदेशों में 43 से अधिक रेस्त्रां हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में, सर्वना भवन 29 अरब का राजस्व एकत्रित किया था।

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Posted By: Nitin Arora