'AI से न डरें, इसे सहायक बनाएं', CJI सूर्यकांत का न्यायपालिका को संदेश
CJI सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों से AI से न डरने और इसे सहायक के रूप में उपयोग करने का आग्रह ...और पढ़ें
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AI से न डरें इसे सहायक बनाएं CJI सूर्यकांत का न्यायपालिका को संदेश (फाइल फोटो)
HighLights
CJI सूर्यकांत ने AI को सहायक के रूप में उपयोग करने को कहा।
तकनीक मानवीय विवेक का विकल्प नहीं, केवल एक उपकरण है।
न्यायिक स्वतंत्रता पर एल्गोरिथम के प्रभाव से मुक्ति आवश्यक।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा करते हुए न्यायिक अधिकारियों से कहा कि वे AI से भयभीत न हों।
उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह जटिल कानूनी सवालों को सुलझाने में धैर्य और विचार का उपयोग किया जाता है, उसी तरह एआइ उपकरणों का भी सचेत रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। तकनीक कभी भी मानवीय विवेक का विकल्प नहीं हो सकती, बल्कि यह केवल एक सहायक के रूप में कार्य करनी चाहिए।
बेंगलुरु में आयोजित न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया में एआइ का एकीकरण 'संतुलन के सिद्धांत' पर आधारित होना चाहिए। दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ मानवीय अनुभव और 'संवैधानिक चेतना' को सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
CJI ने क्या कहा?
उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी उपकरणों के उपयोग के दौरान न्यायाधीशों की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होनी चाहिए और अंतिम निर्णय हमेशा मानवीय बुद्धि द्वारा ही लिया जाना चाहिए। इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता का अर्थ अब केवल बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि एल्गोरिदम के प्रभाव से भी मुक्ति है।
उन्होंने जोर दिया कि एआइ केवल एक सहायक उपकरण होना चाहिए; न्याय का आधार हमेशा मानवीय निर्णय, संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन पर टिके रहना चाहिए। एक अन्य कार्यक्रम में सीजेआइ सूर्यकांत ने 'ऊर्जा न्याय' को भारत के विकास का 'नैतिक आधार' बताया। उन्होंने आर्थिक प्रगति और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि भारत का 2047 का दृष्टिकोण पारिस्थितिक संवेदनशीलता और नागरिकों के स्वच्छ भविष्य के अधिकारों पर टिका होना चाहिए।
