सीजेपी का समर्थन, लेकिन कांग्रेस से किनारा... क्या SIR पर नया मोर्चा खोलने की तैयारी कर रही DMK?
डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के खिलाफ सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों का खुला समर्थन किया है। पार्टी ने ...और पढ़ें

डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन(फोटो: एएनआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों को अपना खुला समर्थन दे दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने कांग्रेस से दूरी बना ली है, जो अब तक चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक पार्टियों के प्रदर्शन की अगुवाई कर रही है।
शनिवार को डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, एसआईआर को रद करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया।
पार्टी ने कांग्रेस और सत्तारूढ़ टीवीके पर एसआईआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। डीएमके उप महासचिव और संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने भी चेन्नई में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर कहा कि पार्टी देश के युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।
कांग्रेस पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप
डीएमके ने कड़े शब्दों में कहा कि वह पीठ में छुरा घोंपने वाली कांग्रेस के साथ किसी भी साझा मंच पर नहीं जाएगी। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने शुरुआत में छात्रों के आंदोलन से दूरी बनाए रखी और जब युवाओं के दम पर आंदोलन ने जोर पकड़ा, तब इसका श्रेय लेने की कोशिश करने लगी।
इसके अलावा, डीएमके नेता ए. राजा ने कहा कि सीजेपी अभी एक राजनीतिक दल के रूप में उभरने की प्रक्रिया में है। डीएमके ने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस टीवीके और भाजपा के गुप्त रिश्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त पर टीवीके की चुप्पी पर कोई सवाल क्यों नहीं उठा रही है।
हिरासत में लिए गए नेताओं के समर्थन में उतरे स्टालिन
एमके स्टालिन ने प्रदर्शनकारियों पर की जा रही पुलिसिया कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने तिरंगा मार्च से पहले सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके की हिरासत पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर पूछा कि प्रशासन उनके ठिकाने का खुलासा क्यों नहीं कर रहा है।
उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत की भी निंदा की और ऐलान किया कि डीएमके इस लड़ाई में सीजेपी को कानूनी सहायता मुहैया कराएगी।
तमिलनाडु में तीसरे मोर्चे की तैयारी
तमिलनाडु में कांग्रेस से अलग होने के बाद डीएमके इंडी गठबंधन से भी दूरी बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार, डीएमके क्षेत्रीय दलों और सीजेपी को साथ लाकर एक नए तीसरे मोर्चे की संभावना तलाश रही है। कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में स्टालिन और अभिजीत दिपके के बीच मुलाकात हो सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि डीएमके की पहल उन युवा मतदाताओं को फिर से अपने पाले में लाने की रणनीति है, जिन्होंने हाल ही में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
संसद सत्र को लेकर रणनीति
यह राजनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें हैं, जिसमें डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण विधेयक पेश किए जा सकते हैं। सांसदों की बैठक में स्टालिन ने कहा कि संसद में आने पर पार्टी परिसीमन के मुद्दे से निपटेगी।
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि 22 सांसदों वाली डीएमके के साथ भाजपा ने भी बातचीत के रास्ते खोले हैं, जहां सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का भरोसा देकर डीएमके का समर्थन जुटाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
