SIR को लेकर स्टालिन का कांग्रेस पर हमला, बिहार विवाद और हेमंत सोरेन के अलग होने की दिलाई याद
DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने ...और पढ़ें

स्टालिन ने कांग्रेस पर साधा निशाना (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने न केवल चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया, बल्कि कांग्रेस पर भी जोरदार राजनीतिक हमला बोला है।
DMK ने एसआईआर मुद्दे पर कांग्रेस के रवैये को दोहरा करार दिया है और विपक्षी गठबंधन के अंदर मौजूद खींचतान को एक बार फिर बाहर ला दिया है।
स्टालिन ने पार्टी का रुख किया साफ
चेन्नई में आयोजित DMK संसदीय दल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्टालिन ने पार्टी के रुख को स्पष्ट किया। इस बैठक में चार प्रमुख प्रस्ताव पारित किए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से हटाया जाए और उनके आचरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों का पूर्ण समर्थन।
इसके साथ ही सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध और उनके आंदोलन का समर्थन और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक सुधार की मांग की गई है। इन प्रस्तावों के जरिए DMK ने कांग्रेस पार्टी को एक कड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया है।
राहुल गांधी के दावों पर सवाल
SIR का मुद्दा सबसे पहले किसने उठाया, इसे लेकर DMK और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस का दावा है कि उनकी पार्टी ने ही सबसे पहले इस प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया था। 29 सितंबर को हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था कि पिछले दो सालों से चुनाव आयोग को लेकर जो माहौल बना है, वह कांग्रेस के तथ्यों पर आधारित अभियानों का नतीजा है।
हालांकि, DMK ने राहुल गांधी के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। DMK का कहना है कि उसने किसी भी अन्य विपक्षी दल से पहले SIR का विरोध शुरू कर दिया था। पार्टी ने याद दिलाया कि स्टालिन ने जुलाई 2025 में ही सबसे पहले इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जब बिहार से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की खबरें आई थीं।
स्टालिन ने बिहार में मतदाता अधिकार यात्रा में भी हिस्सा लिया था, जिसमें DMK की उप-महासचिव कनिमोझी करुणानिधि भी शामिल हुई थीं। DMK ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस के पास इस मुद्दे पर सवाल उठाने या नेतृत्व का दावा करने का कोई नैतिक अधिकार है?
'राज्यों में कांग्रेस का दोहरा रवैया'
DMK द्वारा पारित प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस SIR के मुद्दे पर अलग-अलग राज्यों में दोहरा रुख अपना रही है। प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर तो कांग्रेस इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध कर रही है, लेकिन केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उसने इस पर कोई खास आपत्ति नहीं जताई।
DMK का तर्क है कि यदि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अनियमितताएं हुई हैं, तो यही चिंताएं हर राज्य और हर क्षेत्र पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।
DMK सांसद ए. राजा ने इस हमले को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि SIR लागू होने के बाद से DMK ही पूरे भारत में एकमात्र ऐसी प्रमुख राजनीतिक पार्टी रही है जिसने संसद के भीतर और बाहर लगातार इसकी पोल खोली है।
उन्होंने बताया कि स्टालिन ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखे थे, जिसके बाद कई मुख्यमंत्री इस पर चर्चा करने और प्रस्ताव पारित करने के लिए चेन्नई आए थे।
बिहार चुनाव के अनुभवों का किया जिक्र
कांग्रेस को घेरते हुए DMK ने विपक्षी गठबंधन के भीतर बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आई समस्याओं का भी जिक्र किया। स्टालिन ने याद दिलाया कि बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर लचीलेपन की कमी थी। इसके अलावा, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
कई सीटों पर तो राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वामपंथी दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के ही खिलाफ चुनाव मैदान में उतर आए थे। DMK के अनुसार, ये उदाहरण दर्शाते हैं कि गठबंधन के प्रबंधन में कहां चूक हुई।
चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
DMK का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने SIR के जरिए पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने का काम किया है। जब चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को तमिलनाडु सहित 12 राज्यों में इस प्रक्रिया को चलाने की घोषणा की थी, तब स्टालिन ने चेतावनी दी थी कि इसे राज्य में लागू न किया जाए।
त्योहारों और मानसून के मौसम को देखते हुए नवंबर और दिसंबर में पुनरीक्षण का काम कराने का सख्त विरोध किया गया था।
CJP को समर्थन और TVK पर निशाना
विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि चेन्नई में आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल हुईं, जहां उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के प्रति अपनी पार्टी की एकजुटता व्यक्त की। कनिमोझी ने कहा कि DMK शुरुआत से ही गिरफ्तार नेताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है।
इसी दौरान, DMK ने TVK और उसके प्रमुख विजय पर भी निशाना साधा। DMK ने सवाल किया कि हालिया प्रदर्शनों में शामिल होने के बावजूद विजय ने SIR प्रक्रिया के खिलाफ खुलकर कुछ क्यों नहीं कहा और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग का समर्थन किया।
