नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भारत ने अपनी राजनयिक देवयानी खोबरगड़े को अमेरिकी साजिश का शिकार करार दिया है। संसद के दोनों सदनों में महिला राजनयिक के साथ अमेरिकी एजेंसियों के दु‌र्व्यवहार पर एक सुर में नाराजगी जताते हुए सांसदों ने अमेरिका से बिना शर्त माफी मांगने और मुकदमा खत्म करने की मांग की है। भारत ने देवयानी की फरार नौकरानी के परिवार को वीजा देने के मामले में अमेरिका पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को देवयानी को पूरी राजनयिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पदोन्नत कर संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूतावास स्थानांतरित कर दिया गया।

भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगड़े के साथ बदसलूकी पर उपजे गुस्से का उबाल बुधवार को संसद में भी दिखा। महिला राजनयिक को हथकड़ी लगाने और निर्वस्त्र कर तलाशी लेने की घटना को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निंदनीय करार दिया। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार महिला राजनयिक के सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वह देवयानी को वापस लाने की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाए, तो सदन में नहीं लौटेंगे। न्यूयॉर्क में बतौर उप-वाणिज्यदूत तैनात रहीं देवयानी का आक्रामक बचाव करते हुए खुर्शीद ने महिला राजनयिक को अमेरिकी साजिश का शिकार बताया। राजनयिक के खिलाफ हुई कार्रवाई को असंतुलित और अवांछनीय करार देते हुए उन्होंने अमेरिका को मामले में भारत के आग्रहों की अनदेखी को लेकर कठघरे में खड़ा किया।

देवयानी की गिरफ्तारी प्रकरण की समीक्षा करेगा अमेरिका

खुर्शीद के मुताबिक भारत ने जून, 2013 में देवयानी की नौकरानी के घर से लापता होने से लेकर उसके परिवार के खिलाफ लंबित कार्रवाई तक हर स्तर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि जून में नौकरानी के गायब होने का मामला न्यूयॉर्क पुलिस में दर्ज कराया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुछ समय बाद देवयानी को एक वकील ने फोन कर मामला निपटाने की पेशकश की। इससे साफ है कि महिला राजनयिक के खिलाफ साजिश रची गई है। वहीं, विदेश मंत्री ने भारत की ओर से अमेरिकी राजनयिकों को हासिल विशेष रियायतों की समीक्षा के फैसले को जायज ठहराते हुए कहा कि हम वही सुविधाएं देंगे जो हमें वहां हासिल हैं। गौरतलब है कि देवयानी मामले की प्रतिक्रिया में भारत ने अमेरिकी दूतावास के बाहर लगे अतिरिक्त ट्रैफिक बैरियर हटाने से लेकर दूतावास के सभी आयातों पर रोक जैसे कई कदम उठाए हैं।

संसद में देवयानी के बहाने सरकार विदेशनीति के मुद्दों पर भी घिरी नजर आई। राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि सरकार लगातार कमजोरी के संकेत देती रही हैं, जिसकी परिणति इस शक्ल में नजर आ रही है। भारत की संप्रभुता के खिलाफ कई पड़ोसी मुल्कों की गुस्ताखियों से लेकर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की जासूसी पर हमारी चुप्पी तक कई कारणों ने मौजूदा हालात की जमीन बनाई है। लोकसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अमेरिकी धरती पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीज से लेकर उत्तार प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खान व केंद्रीय मंत्री प्रफुल पटेल के साथ सुरक्षा के नाम पर हुई बदसलूकी का मामला उठाया। गुस्से के उबाल में संजय निरुपम जैसे कांग्रेसी नेताओं ने भी सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणियां की। उन्होंने आरोप लगाया कि टोगो की जेल में बंद भारतीय नाविक सुनील जोस को वापस लाने के लिए सरकार के स्तर पर पर्याप्त प्रयास ही नहीं किए जा रहे।

'देवयानी को सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी हमारी है और ऐसा नहीं कर पाए तो संसद नहीं लौटेंगे।'

-सलमान खुर्शीद, विदेश मंत्री

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