नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने डेंगू के टेस्ट को लेकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने ऐसी डिवाइस का निर्माण किया है, जिससे एक घंटे में डेंगू है या नहीं, इसके बारे में जानकारी मिल जाएगी। मौजूदा समय में डेंगू की जांच के लिए आरटी-पीसीआर किया जाता है, जिसमें समय लगता है और साथ ही इसके उपकरण भी महंगे होते हैं।

आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की बीमारी का डायग्नोसिस जल्दी होना आवश्यक है। इस बात को समझते हुए भौतिक विज्ञान विभाग के ग्लांसिंग एंगल डिपोजिशन (ग्लैड) रिसर्च ने एक डिवाइस का निर्माण किया है, जो एक घंटे के भीतर यह पता कर लेगी। इस डिवाइस का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया है।

इस प्रोजेक्ट के प्रमुख आईआईटी दिल्ली के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जे. पी. सिंह का कहना है कि संस्थान ने सरफेस एनहांस्ड रमन स्पैक्ट्रोस्कोपी (एसईआरएस) प्लेटफॉर्म का प्रयोग डेंगू का पता लगाने के लिए किया। इसके परिणाम सकारात्मक रहे। इस तकनीक में दो माइक्रोलीटर सीरम को एसईआरएस में डाला गया। इसके बाद कुछ प्रयोगों से गुजरते हुए एक घंटे के अंदर में ही परिणाम आ गया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक का प्रय़ोग फील्ड स्तर पर किया जा सकता है। साथ ही वायरल रोगों की पहचान में भी इसका सफलतापूर्वक प्रय़ोग किया जा सकता है।

जानें, कैसे और कब होता है डेंगू

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर तक में सबसे ज्यादा फैलता है।

इस तरह फैलता है डेंगू

डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उसका खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।  

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