SEM कोर्ट क्या है, सौरव-रांका की रिहाई के दिए आदेश; सामान्य कोर्ट से कितना अलग
दिल्ली की एसईएम अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहाई के आदेश दे दिए हैं।

एसईएम कोर्ट ने सौरव दास, आशुतोष रांका की रिहाई के आदेश दिए
HighLights
एसईएम कोर्ट ने सौरव दास, आशुतोष रांका की रिहाई के आदेश दिए
एसईएम कोर्ट सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाती है।
यह सामान्य अदालतों से अलग है, न्यायिक शक्तियां सीमित होती हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत मामले में दिल्ली की SEM अदालत ने CJP नेताओं को जमानत दे दी। करीब डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई के बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर SEM कोर्ट क्या है और क्या ये सामान्य कोर्ट से अलग है?
एसईएम कोर्ट क्या है?
एसईएम का मतलब होता है स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट। जब सौरव दास को यहां ले जाया जा रहा था तब उन्होंने एसईएम को पुलिस कोर्ट कहा था। साथ ही कहा था कि यहां कोई न्याय नहीं है।
यहां का मुख्य काम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाना है। यहां के मजिस्ट्रेट की शक्तियां काफी सीमित रहती हैं। मजिस्ट्रेट शांति भंग होने से रोकने के लिए कुछ शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन वे मुकदमों की सुनवाई नहीं कर सकते। कई बार कोर्ट ने भी इनकी शक्तियों के इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
BNS की धारा 126 और 143 तक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पर किसी व्यक्ति से बॉन्ड भरवा सकता है।
जब कोई व्यक्ति इस पीस बॉन्ड का उल्लंघन करता है, तो मजिस्ट्रेट धारा 130 के तहत जांच शुरू करता है। यानी एसईएम का काम बॉन्ड भरवाने या उसके उल्लंघन तक ही सीमित होता है। कई बार एसईएम का दफ्तर किसी थाने में रखा जाता है, इसलिए उसे थाने का एसईएम कोर्ट कहा जाता है।
क्या ये सामान्य कोर्ट से अलग है?
हां एसईएम कोर्ट सामान्य कोर्ट से काफी अलग है। सामान्य कोर्ट अपराध की सुनवाई करके तय करती है कि आरोपी दोषी है या नहीं, जबकि एसईएम का मुख्य काम संभावित शांति भंग रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई करना है।
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सरकार के अधीन काम करते हैं और उनके पास न्यायिक शक्तियां नहीं होतीं। उनकी पदोन्नति, वेतन बढ़ोतरी और सेवा में वरिष्ठता उनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर निर्भर करती है। परंपरागत रूप से एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट राजस्व या प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।
दिल्ली में दिल्ली पुलिस अधिनियम केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह पुलिस आयुक्त और एसीपी रैंक से नीचे के न होने वाले अधीनस्थ अधिकारियों को जिला मजिस्ट्रेट और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत कर सकती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायपालिका के अधीन होते हैं, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण हाई कोर्ट के पास होता है। वे मुकदमों की सुनवाई कर सकते हैं।
क्यों हिरासत में लिए गए थे दास और रांका
रांका और दास को 14 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने और जंतर-मंतर में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फिर सोमवार को एसईएम ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। इस तरह उनकी कुल हिरासत सात दिन हो गई, अब बुधवार को कोर्ट ने दोनों को जमानत के आदेश दे दिए हैं।
