नई दिल्‍ली, एजेंसी। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को अभिनेता से नेता बने कमल हासन की उस टिप्‍पणी को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें उन्‍होंने कथित तौर पर कहा था कि 'स्वतंत्र भारत का पहला उग्रवादी एक हिंदू था।' भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई याचिका में निर्वाचन आयोग को चुनावी लाभ लेने की मंशा से धर्म के बारे में अनुचित बयानबाजी करने पर 'प्रतिबंध' लगाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस सिस्‍तानी और जस्टिस ज्‍योती सिंह ने कहा कि कमल हासन के बयान से संबंधित मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र के बाहर है, इसलिए वह इस पर सुनवाई नहीं कर सकती है। हालांकि अदालत ने निर्वाचन आयोग से कहा है कि वह कमल हासन की हालिया टिप्पणी के मामले में तेजी से फैसला ले। याचिका में चुनावी लाभ के लिए धर्म के दुरूपयोग को लेकर दलों का पंजीकरण रद्द करने और प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की भी मांग की थी।  

विदित हो कि कमल हासन ने बीते दिनों तमिलनाडु के अरवाकुरिचि में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि 'मैं ऐसे स्वाभिमानी भारतीय हूं जो समानता वाला भारत चाहता हूं। मैं ऐसा इसलिए नहीं बोल रहा हूं कि यह मुसलमान बहुल इलाका है, बल्कि मैं यह बात गांधी की प्रतिमा के सामने बोल रहा हूं। आजाद भारत का पहला उग्रवादी हिन्दू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे है। वहीं से इसकी (उग्रवाद) शुरुआत हुई।'

कमल हासन के बयान का एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी समर्थन किया था। ओवैसी ने कहा था कि जिसने राष्ट्रपिता माने जाने वाले महात्मा गांधी की हत्या की, उसे हम क्या कहें। हम उसे महात्मा कहें या राक्षस कहें, आतंकवादी या हत्यारा। उन्होंने सवाल किया था कि बापू की हत्या करने वाले शख्स को यदि आतंकवादी नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे। जबकि अभिनेता विवेक ने ट्वीट कर कहा कि हासन को देश को नहीं बांटना चाहिए। 

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Krishna Bihari Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप