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10 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन... दिल्ली में लगी पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें

Published: Fri, 09 Oct 2026 08:06 PM (GMT+05:30)

CJP के दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने व्यापक पाबंदियों पर सवाल उठाए हैं।

CJP के प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट सख्त

CJP के प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट सख्त

HighLights

  1. मेट्रो ट्रेनों को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है।

  2. सुरक्षा उपाय आनुपातिक होने चाहिए, अनावश्यक पाबंदी नहीं।

  3. आम जनता की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 10 अक्तूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP विरोध प्रदर्शन करने वाली है। जिससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शहर में कानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए कुछ निर्देश दिए हैं।

विरोध के लिए नहीं बंद हो सकता शहर-SC

सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रांसपोर्ट पर लगाई गई व्यापक पाबंदियों पर सवाल उठाए और कहा कि सुरक्षा उपायों के कारण शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क ठप नहीं होना चाहिए।

बेंच ने चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शन को संभालने के नाम पर पूरे शहर को बंद नहीं किया जा सकता है। साथ ही मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली में 57 मेट्रों स्टेशनों को बंद करने और लंबी दूरी की ट्रेनों को रद करने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में 10 मुख्य बातों का जिक्र किया है।

1. मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता है

कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान ये स्पष्ट किया कि मेट्रो ट्रेनों को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। कोर्ट ने कहा, 'मेट्रो ट्रेनों के चलने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी।'

2. अधिकारी पाबंदी पर एक बार फिर विचार करें

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि वह अधिकारियों से मेट्रों और अन्य रेलवे सेवाओं को उचित तरह से नियंत्रित करके चलाने की अनुमति देने का आग्रह करेंगे।

3. लोगों की सुविधा का रखा जाए ध्यान

बेंच ने कहा कि रोजाना आवाजाही करने वाले छात्रों, कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों और रोगियों का ध्यान रखना जरूरी है। कोर्ट ने कहा,'सावधानी बरतें! बहुत ज्यादा सावधानी बरतें। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। कानून व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है और यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है।'

4. जरूरत के हिसाब से हों सुरक्षा उपाय

CJI सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारी अनियंत्रित गतिविधियों को रोक सकते हैं, लेकिन आम नागरिकों को ट्रांसपोर्ट सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

5. आनुपानिकता (Proportionality) का सिद्धांत लागू

CJI ने कहा कि सुरक्षा के उपाय आनुपातिक होने चाहिए। उन्होंने कहा, 'हर नागरिक के लिए हम जो एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत अपनाते हैं, वह है आनुपातिकता का सिद्धांत।

आपको कुछ चीजों को रोकना होता है, उसके लिए जरूरी उपाय ही करें। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप मक्खी को मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें।'

6. लंबी दूरी की ट्रेन रद होने पर चिंता

सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने लंबी दूरी की ट्रेनों के रद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपना तर्क देते हुए कहा कि जिन यात्रियों को किसी काम से समय पर दिल्ली आना था उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

7. सड़कों पर लगी पाबंदी की समीक्षा जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अधिकारी केवल संवेदनशील इलाकों में ही आवाजाही नियंत्रित करें और सुनिश्चित करें कि शहर के बाकी हिस्सों में ट्रैफिक बिना रुकावट के चलता रहे।

8. ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करने के निर्देश

अदालत ने दिल्ली प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया कि वे आम जनता की सुविधा के लिए समय पर और स्पष्ट ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करें।

9. बदले फैसलों की व्यापक जानकारी दें

कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मेट्रो और रेलवे संचालन से जुड़े नियमों और फैसलों की जानकारी बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाएं, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

10. केंद्र विरोध प्रदर्शन की जगह बदलने पर विचार करें

कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह भविष्य में शांतिपूर्ण और कानूनी विरोध प्रदर्शन के लिए जरूरी सुविधाओं वाली किसी दूसरी उपयुक्त जगह की पहचान करने पर विचार करें

दिल्ली में क्यों है CJP का विरोध प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह विरोध प्रदर्शन 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होना है। पार्टी के कार्यकर्ता और आयोजक मतदाता सूची (Voter List) में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।