विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'विधायक निर्मला सप्रे की अयोग्यता याचिका पर 2 महीने में फैसला करें स्पीकर', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:

Published: Thu, 05 Nov 2026 02:00 AM (IST)

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सप्रे के खिलाफ दायर याचिका पर ...और पढ़ें

विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर दो महीने में फैसला लें : सुप्रीम कोर्ट

विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ अयोग्यता याचिका पर दो महीने में फैसला लें : सुप्रीम कोर्ट

HighLights

  1. यह याचिका दो साल से अधिक समय से लंबित है, जल्द आ सकता है फैसला

  2. बागी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ जल्द फैसले करने का आदेश

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे बागी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लें।

यह याचिका दो साल से अधिक समय से लंबित है। कोर्ट ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दायर याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सप्रे के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द फैसला लेने से इनकार करने के लिए हाई कोर्ट के रुख पर भी नाराजगी जताई।

मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार द्वारा जुलाई 2024 में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सप्रे ने अपनी मर्जी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी, वह पार्टी जिसके टिकट पर वे 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनी गई थीं, और भाजपा में शामिल हो गईं।

मंदिर की जमीन से पेरियार की प्रतिमा हटाकर उपयुक्त जगह ले जाएं : हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने तंजावुर के जिला कलेक्टर को तर्कवादी नेता ईवी रामासामी पेरियार की प्रतिमा मंदिर की जमीन से हटाकर चार सप्ताह के भीतर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि प्रतिमा अधिकारियों से अनुमति लिए बिना वहां स्थापित की गई थी

जस्टिस पी. वेलमुरुगन और जस्टिस केके रामकृष्णन की खंडपीठ ने तंजावुर जिले के तिरुवैयारू तालुका के कंडियूर स्थित अरुल्मिगु ब्रह्मसिरकंडेश्वरर मंदिर की जमीन से प्रतिमा हटाने का आदेश दिया।

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने आदेश में कहा,"चूंकि प्रतिमा मंदिर प्राधिकरण, जिला कलेक्टर या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लिए बिना मंदिर की जमीन पर स्थापित की गई है, इसलिए कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह प्रतिमा को मंदिर की जमीन से सुरक्षित तरीके से हटाएं और आज से चार सप्ताह के भीतर उसे किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर रखें तथा रिपोर्ट दाखिल करें।"

ध्यान रहे कि ईवी रामासामी (1879-1973) की प्रतिमा दशकों पहले मंदिर की बाहरी सीमा के पास स्थापित की गई थी। सुधारवादी द्रविड़ नेता और परंपराओं को चुनौती देने वाले रामासामी को सम्मानपूर्वक ‘पेरियार’ कहा जाता था।

दुष्कर्म के आरोपित ने पीड़िता से की शादी फिर भी कोर्ट ने नरमी दिखाने से किया इनकार

महाराष्ट्र के लातूर की एक जिला अदालत ने पाक्सो अधिनियम के तहत एक अहम फैसला सुनाते हुए 35 वर्षीय व्यक्ति विपुल सखाराम बांकर को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दिलचस्प बात यह है कि सुनवाई के दौरान आरोपित ने पीड़िता से शादी कर ली थी, लेकिन अदालत ने किसी भी प्रकार की नरमी बरतने से इनकार कर दिया।

न्यायाधीश एस.ए. सैयद ने दो नवंबर को आरोपित को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 सितंबर 2015 को आरोपित ने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर अगवा किया था और उसका यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता के पिता की शिकायत पर लातूर ग्रामीण पुलिस ने आइपीसी और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

मुकदमे के दौरान पीड़िता समेत 14 गवाहों से पूछताछ की गई। हालांकि आरोपित ने सुनवाई के दौरान पीड़िता से शादी कर ली और दावा किया कि उसका एक बच्चा भी है, लेकिन अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आपसी विवाद के कारण अब वे साथ नहीं रह रहे हैं। अदालत ने आरोपित की दलील को खारिज करते हुए उसे दोषी ठहराया।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।