डीडीयू-जीकेवाई योजना: 1.83 लाख ग्रामीण युवाओं को मिलेगी नौकरी, कैसे करें अप्लाई?
केंद्र सरकार ने ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाने के लिए उद्योगों से हाथ मिलाया है।

ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार मिलेगा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने उद्योग जगत से हाथ मिलाया है। कंपनियों को अपनी जरूरत के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षित करने और फिर उन्हें नौकरी पर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के दूसरे चरण में 1.83 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य है। प्रशिक्षित युवाओं में कम से कम 20 प्रतिशत को कैप्टिव एंप्लायमेंट के तहत कंपनियां अपने यहां नौकरी देने की व्यवस्था करेंगी। इच्छुक कंपनियों को राज्यों की क्रियान्वयन एजेंसियों की ओर से जारी रुचि अभिव्यक्ति (ईओआई) के तहत आवेदन करना होगा।
हालांकि, किस कंपनी में कितने युवाओं की भर्ती होगी और उन्हें कौन-सा काम मिलेगा, यह संबंधित कंपनियों की जरूरत और भर्ती योजनाओं पर निर्भर करेगा। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने उद्योग जगत के 50 से अधिक नियोक्ता, उद्योग संगठनों, सेक्टर स्किल काउंसिल और विभिन्न राज्यों के अधिकारियों के साथ वार्ता की है।
किन-किन कंपनियों में मिलेगी नौकरी?
सरकार का विनिर्माण, आटोमोबाइल, कपड़ा, आतिथ्य, खुदरा कारोबार, आईटी, टेलीकाम और बिजली जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर है। युवाओं को मशीन चलाने, उत्पादन, सिलाई, कपड़ा बनाने, तकनीकी सहायता, ग्राहक सेवा, स्टोर संचालन, बिलिंग, होटल प्रबंधन एवं हाउसकीपिंग जैसे कामों की ट्रेनिंग दी जा सकती है।
इसके लिए उन्हीं पंजीकृत कंपनियों को पात्र माना जाएगा जिन्होंने तीन वर्षों में अपने संस्थान या उसकी सहायक कंपनियों में कम से कम 500 लोगों को नौकरी दी हो। पात्र कंपनियों एवं क्रियान्वयन एजेंसियों को तय काम और उपलब्धियों के आधार पर सरकार की ओर से चार किस्तों में भुगतान किया जाएगा।
अंतिम किस्त का भुगतान रोजगार संबंधी शर्तों को पूरा करने के बाद किया जाएगा। नियमों के अनुसार कंपनी को कम से कम छह महीने तक प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी पर रखना जरूरी होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेनिंग के नाम पर सिर्फ खर्च नहीं लिए गए हैं, बल्कि युवाओं को वास्तव में रोजगार मिले हैं और वे नौकरी में बने हुए भी हैं।
12.44 लाख युवाओं को मिल चुका रोजगार
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नौकरी गांव या उसके आसपास ही मिलेगी। रोजगार का स्थान कंपनी की इकाई, काम की प्रकृति और उपलब्ध पदों पर निर्भर करेगा।
जरूरत के अनुसार युवाओं को दूसरे शहरों या राज्यों में भी काम करना पड़ सकता है। जिन प्रमुख कंपनियों से वार्ता हुई है, उनमें गारमेंट बनाने वाली कंपनी साही एक्सपोर्ट्स, एयर कंडीशनर बनाने वाली डाइकिन इंडिया, आटोमोबाइल उद्योग से जुड़ी मारुति सुजुकी एवं रिटेल कारोबार से संबंधित टाटा ट्रेंट आदि प्रमुख हैं।
अभी तक इस योजना में 18.49 लाख युवाओं को ट्रेनिंग और उनमें 12.44 लाख को रोजगार भी मिल चुका है। प्रशिक्षित युवाओं में कम से कम 70 प्रतिशत को रोजगार या तय शर्तों के अनुरूप स्वरोजगार के परिणाम प्राप्त करने पर जोर है।
