अनिमेष पाल, रायपुरः छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में मां दुर्गा बनकर नक्सलियों पर नकेल कसने का कार्य अब महिला पुलिसकर्मी भी पूरे साहस और संकल्प के साथ कर रही हैं। ममता का पर्याय मानी जाने वाली नारी शक्ति हाथों में बंदूक थामकर दुश्मनों का संहार करने निकल पड़ी है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस के दंतेश्वरी फाइटर्स लड़ाकू दस्ते में 60 महिलाएं हैं, जिनमें से अधिकांश विवाहित हैं। ये किसी की बेटी, किसी की पत्नी तो किसी की मां हैं। परिवार का दायित्व निभाने के साथ नक्सल मोर्चे पर देश के दुश्मनों का संहार कर राष्ट्रसेवा में भी लीन हैं। बस्तर पुलिस के आंकड़ों के अनुसार तीन वर्ष में 70 से अधिक मुठभेड़ में रहते हुए 10 से अधिक नक्सलियों को मार गिराने में सफल रही है।

सिविक एक्शन में अंदरुनी गांव के ग्रामीणों का इलाज करती दंतेश्वरी फाइटर्स।

नक्सलियों को गोली तो ग्रामीणों को दवा

बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (आइजीपी) व इंचार्ज नक्सल आपरेशन सुंदरराज पी बताते हैं कि देश के लिए नासूर बन चुके नक्सलियों को सबक सिखाने के साथ ही घने जंगली क्षेत्र में बसे गांव के निवासियों की देखभाल का भी काम यह ब्रिगेड बखूबी कर रही है। इस ब्रिगेड में 10 आत्मसमर्पित नक्सली भी हैं। प्रशिक्षण के बाद ये लगातार अंदरूनी क्षेत्र में नक्सलियों को चुनौती दे रही हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों का विश्वास जीतने की भी कोशिश कर रही हैं। बेहद दुर्गम क्षेत्र में बसे इन गांवों की महिलाओं को हाइजीन के बारे में बताना हो, बीमार पड़ने पर दवाई देकर इनका इलाज करना या शासन-प्रशासन की योजनाओं की जानकारी देना, ये सभी जिम्मेदारियां दंतेश्वरी फाइटर्स की महिला सिपाही बखूबी निभा रही हैं।

नक्सलियों का साथ छोड़ अब देश की लड़ाई

नक्सली संगठन के लिए काम कर चुकी अबूझमाड़ क्षेत्र के गांव बटवेड़ा की सुदंरी इस्काम अब दंतेश्वरी फाइटर्स का हिस्सा हैं। सुंदरी ने बताया कि वर्ष 2005 में नक्सली उन्हें गांव से उठा ले गए। नक्सलियों के लिए वह कई हिंसक वारदातों में शामिल रहीं। संगठन के विलास से उन्हें प्रेम हो गया तो दोनों गांव लौट आए और शादी कर ली। उन्हें डर था कि नक्सलियों को पता चलेगा तो उन्हें मार डालेंगे। समर्पण के बाद वर्ष 2019 में पुलिस में शामिल हो गई। अब नक्सलियों से लड़ रही है। कुछ वर्ष पहले तुर्रेवाड़ा में नक्सली हलचल की सूचना के बाद दस्ता वहां पहुंचा तो नक्सलियों ने घेर लिया। चारों तरफ से फायरिंग होने लगी। मुठभेड़ में एक नक्सली को मार गिराया जो सेक्शन कमांडर रैंक का था। वह एक मां भी है, बेटा तीसरी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। नक्सल मोर्चे के साथ घर और बच्चे की जिम्मेदारी भी संभालती है।

बस्तर के जंगल में सर्चिंग करती दंतेश्वरी फाइटर्स की जवान।

पति की जगह खुद उठा ली बंदूक

बस्तर में लड़ाई सिर्फ नक्सलियों से नहीं, दूसरी चुनौतियों से भी है। बस्तर ब्रिगेड की लड़ाकू सुमित्रा ठाकुर के पति शिवबच्चन नक्सल मोर्चे पर अंदरुनी इलाके के चिंतागुफा में तैनात थे, तब मलेरिया से मौत हो गई।अब सुमित्रा पति की जगह नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए है। सुमित्रा बताती है, बस्तर के जंगल महिला-पुरुष में भेद नहीं करते। यहां सबके लिए एक समान मुश्किलें है। यहां दिन हो या रात हर वक्त आपको सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि कभी भी गश्त में जाना पड़ता है। कई बार जंगल में ही कैम्प करते हैं। कटेकल्याण क्षेत्र के आदवाल में नक्सलियों की हलचल की सूचना पर टीम गई थी। मुठभेड़ में एक महिला नक्सली को मार गिराने में वे सफल रही। उनका बेटा राहुल स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुका है। वह भी सुरक्षा बल में भर्ती होकर नक्सलियों के खिलाफ लड़ना चाहता है।

फैक्ट: छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर की अाराध्य देवी मां दंतेश्वरी के नाम पर बस्तर पुलिस ने दंतेश्वरी फाइटर्स का गठन किया। 2019 में गठन के बाद अब इसमें 60 महिला लड़ाकू है। किवदंतियों के अनुसार भगवान शिव के माता सती के शरीर को ले जाते हुए उनका दांत गिरने के बाद इस जगह अब मां दंतेश्वरी आदिशक्तिपीठ की स्थापना की गई। दंतेवाड़ा नगर का नाम मां दंतेश्वरी के नाम पर है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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