विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 04, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारतीय सिनेमा के सूत्रधार रहे दादा साहेब फाल्के, 1969 से दिया जा रहा फाल्के पुरस्कार

By Manish PandeyEdited By:
Published: Sun, 04 Apr 2021 09:30 AM (IST)

दादा साहेब फाल्के के साथ ही भारतीय सिनेमा का वह स्वर्णिम सफर शुरू हुआ जिसने आज अपनी एक विशिष्ट पहचान ...और पढ़ें

दादा साहेब फाल्के सिर्फ एक फिल्म निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि हरफनमौला थे।
दादा साहेब फाल्के सिर्फ एक फिल्म निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि हरफनमौला थे।

नई दिल्ली, योगेश कुमार गोयल। वर्ष 2019 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत को दिए जाने का एलान हुआ है। भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहेब फाल्के के नाम पर यह पुरस्कार वर्ष 1969 से दिया जा रहा है। भारतीय सिनेमा और उसके विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को मिलने वाले इस पुरस्कार को भारतीय सिने जगत के सर्वोच्च सम्मान होने का गौरव प्राप्त है। समग्र मूल्यांकन के बाद ही इसके सुपात्र का चयन किया जाता है। आज की युवा पीढ़ी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के बारे में भले ही थोड़ी बहुत जानकारी रखती हो, किंतु उन्हें दादा साहेब फाल्के के बारे में शायद ही पर्याप्त जानकारी हो।

धुंधीराज गोविंद फाल्के उपाख्य दादा साहेब फाल्के के नाम पर शुरू किए गए पुरस्कार को भारतीय फिल्म जगत का सर्वोच्च पुरस्कार इसीलिए माना जाता है, क्योंकि फाल्के ही भारतीय सिनेमा के जनक रहे। वह सिर्फ एक फिल्म निर्देशक ही नहीं थे, बल्कि हरफनमौला थे। दादा साहेब एक जाने-माने निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे।

वर्ष 1870 में नासिक के एक संस्कृत विद्वान के घर जन्मे फाल्के को बाद में दादा साहेब फाल्के के नाम से जाना गया। उनकी पहली फिल्म थी-राजा हरिश्चंद्र, जिसे पहली फुल लेंथ भारतीय फीचर फिल्म होने का दर्जा हासिल है। 3 मई 1913 को रिलीज हुई यह फिल्म भारतीय दर्शकों में काफी लोकप्रिय हुई थी। कहा जाता है कि उस दौर में उनकी इस फिल्म का बजट 15 हजार रुपये था, जिसकी सफलता के बाद से ही दादा साहेब फाल्के को भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाने लगा। फिल्म राजा हरिश्चंद्र की सफलता से फाल्के साहेब का हौसला इतना बढ़ा कि उन्होंने एक के बाद एक कुछ ही दशकों में 100 से भी ज्यादा फिल्मों का निर्माण किया, जिनमें 95 फीचर फिल्में और 27 लघु फिल्में शामिल थीं।

दादा साहेब फाल्के अक्सर कहा करते थे कि फिल्में मनोरंजन का सबसे उत्तम माध्यम हैं। साथ ही ज्ञानवर्धन के लिए भी वे एक उत्कृष्ट साधन हैं। उनका मानना था कि मनोरंजन और ज्ञानवर्धन पर ही कोई भी फिल्म टिकी होती है। उनकी इसी सोच ने उन्हें एक अव्वल दर्जे के फिल्मकार के रूप में स्थापित किया। उनकी फिल्में निर्माण व तकनीकी दृष्टि से बेहतरीन हुआ करती थीं। इसकी वजह यही थी कि फिल्मों की पटकथा, लेखन, चित्रंकन, कला निर्देशन, संपादन, प्रोसेसिंग, डेवलपिंग, प्रिंटिंग इत्यादि सभी काम वह स्वयं देखते थे और कलाकारों के परिधानों का चयन भी अपने हिसाब से ही करते थे। फिल्म निर्माण के बाद फिल्मों के वितरण और प्रदर्शन की व्यवस्था भी वही संभालते थे। उन्होंने अपनी फिल्मों में महिलाओं को भी कार्य करने का अवसर दिया। वास्तव में उनके साथ ही भारतीय सिनेमा का वह स्वर्णिम सफर शुरू हुआ, जिसने आज अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।