नई दिल्ली। Coronavirus: वैज्ञानिक आधारों पर जांची-परखी भारतीय मान्यताओं-परंपराओं को अब पश्चिम भी अपनाने पर जोर दे रहा है। नमस्ते के बाद जूते-चप्पलों को घर के बाहर रखने पर वहां जोर दिया जा रहा है। कोरोना के प्रकोप ने उन्हें भारतीय ज्ञान-विज्ञान में उम्मीद की किरण नजर आने लगी है।

पहले पश्तिम के देश आधुनिकता के नाम पर इन भारतीय परंपराओं को पिछड़ी सोच बताकर विरोध जताते थे। तभी तो आधुनिकता के नाम पर वहां के लोग किचन तक जूते पहनकर घूस जाते हैं। डेलीमेल के अनुसार अब भारतीय पंरपरा को अपनाने पर वहां के वैज्ञानिक भी जोर दे रहे हैं। तमाम शोधकर्ता और वैज्ञानिक कह रहे हैं कि कृपया अपने जूते आप घर के बाहर ही उतारिए और उन्हें साफ रखिए, ताकि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ी जा रही वैश्विक लड़ाई को जीता जा सके। ऑस्ट्रेलिया में बाकायदा सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जूते घर के बाहर उतारकर ही अंदर जाएं।

जूते कोरोना के वायरस की शरणस्थली : कैलिफोर्निया के सैन डियागियो शहर की डॉ. जॉर्जियन नैनोस ने बताया कि जूते कोरोना वायरस के बड़े वाहक हो सकते हैं। इन्हें हर हाल में घर से बाहर ही उतार देना चाहिए। जूते का सोल बैक्टिरिया, फंगस और वायरस की अच्छी शरणस्थली है। डेलीमेल के अनुसार डॉ. नैनोस के दावे को वायरोलॉजिस्ट डॉ. मैरी ई स्कैमिडट भी सही बताती हैं। उन्होंने कहा कि जूता चाहे लेदर का हो या कैनवास का या फिर किसी सिंथेटिक पदार्थ का, उस पर वायरस जिंदा रह सकते हैं। कोरोना वायरस के लिए जूते बेहतरीन कैरियर हैं। जूतों पर कोरोना वायरस पांच दिन तक जिंदा रह सकता है, जबकि स्टील और प्लास्टिक पर कोरोना वायरस तीन दिन (72 घंटे) तक ही जिंदा रह सकता है।

जूते रखें साफ : कैनवास और साफ फैब्रिक-सिंथेटिक लैदर से बने जूतों को कम तापमान में साबुन से अच्छी तरह साफ करें। लेदर के जूतों को 70 प्रतिशत एल्कोहल वाले किसी भी डिस्इंफेक्शन मटीरियल से साफ करें। पूरा जूता साफ करें। फीते और हील को साफ करना कतई न भूलें।

सोल है बेहतरीन शरणस्थली : जूते के सोल को लंबे समय तक टिकने के लिहाज से बनाया जाता है। सामान्य रूप से रबड़, पीवीसी (प्लास्टिक) या लेदर को प्लास्टिक के साथ मिलाकर सोल तैयार किया जाता है। इन्हें सघन रूप से गुथा जाता है। इसमें किसी तरह के छेद नहीं होते हैं। सोल से किसी भी तरह की हवा, पानी या नमी अंदर नहीं जा सकती है। उसके यही गुण बैक्टीरिया, फंगस और वायरस के लिए बेहतरीन हालात मुहैया कराते हैं।

फीते और हील पर भी जिंदा रह सकता है कोरोना : फीते और हील पर भी कोरोना वायरस जिंदा रह सकता है। इसका कारण भी साफ है। दोनों चीजें सिंथेटिक पदार्थों से बनाई जाती हैं।

जूते से कैसे फैलता है कोरोना वायरस : किसी कोरोना संक्रमित की खांसी, थूकने और छींकने से ड्रॉपलेट्स अधिकतम दो मीटर तक जा सकते हैं। वे जमीन पर गिर सकते हैं या पास खड़े किसी व्यक्ति के जूते पर। डेलीमेल के अनुसार जमीन पर पड़े ड्रॉपलेट पर आपका जूता पड़ेगा तो कोरोना वायरस उस पर आ जाएगा। इसके बाद वह व्यक्ति जूते पहनकर घर में आ जाता है। भले ही वह हाथ साफ कर ले लेकिन, अब कोरोना वायरस उसके पूरे घर में है। ऐसे में हालात बहुत खराब हो सकते हैं। डॉ. नैनोस जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कोरोना इसी तरह फैला।

अलग-अलग रखें फुटवियर : ऑस्ट्रेलिया की पब्लिक हेल्थ की विशेषज्ञ डॉ. कोरलो विनर कहती हैं कि अगर आप घर के बाहर जाते हैं तो कृपया जूते घर के बाहर गैराज या मुख्य गेट से बाहर ही निकाल दें। घर में बाहर के जूते न लाएं। घर के अंदर के फुटवियर अलग रखें।

कहां ज्यादा खतरा : सुपर मार्केट, एयरपोर्ट और अस्पताल जाने वाले और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने वाले लोगों के जूते कोरोना वायरस की शरणस्थली बन जाते हैं।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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